शिवपुरी,
शिवपुरी(HRIDAY STAMBH);
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले की ऐतिहासिक और प्रसिद्ध सांख्य सागर झील इस समय गंभीर पर्यावरणीय संकट से जूझ रही है। शहर से निकलने वाले अनट्रीटेड सीवेज के लगातार झील में गिरने से इसके पानी की गुणवत्ता में भारी गिरावट आई है, जिससे इसमें पनपने वाले जलीय जीवों और वनस्पतियों के अस्तित्व पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
एमपीपीसीबी लैब रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे
मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) की प्रयोगशाला में जांचे गए सांख्य सागर झील के पानी के नमूनों की रिपोर्ट बेहद चिंताजनक पाई गई है:
- खतरनाक फीकल कोलीफॉर्म: झील के पानी में मानव व पशु अपशिष्ट में पाए जाने वाले फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया का स्तर 5 MPN/100ml दर्ज किया गया। इसके विपरीत, जंगल स्थित प्राकृतिक स्रोत ‘भूरा खो’ तालाब में यह पूरी तरह अनुपस्थित (शून्य) पाया गया।
- फॉस्फेट की अत्यधिक मात्रा: सांख्य सागर में फॉस्फेट का स्तर 1.0 mg/l दर्ज किया गया, जो ‘भूरा खो’ तालाब (0.08 mg/l) की तुलना में करीब 12.5 गुना अधिक है।
काई और शैवाल से घुट रहा जलीय जीवों का दम
वन विभाग की तकनीकी विश्लेषण रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू सीवेज और डिटर्जेंट के सीधे मिलने से पानी में फॉस्फेट का स्तर बढ़ा है। इसके कारण जल निकाय में काई और शैवाल (Algae) का अनियंत्रित प्रसार हो रहा है, जिससे घुली हुई ऑक्सीजन (Dissolved Oxygen) में भारी कमी आ रही है और मछलियों व अन्य जलीय जीवों का दम घुट रहा है।
एसटीपी होने के बावजूद झील में जा रहा सीवेज
शहर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) स्थापित होने और दावों के बावजूद सांख्य सागर में लगातार गिरता अनट्रीटेड सीवेज, शिवपुरी नगर पालिका और जन स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
लापरवाह अधिकारियों पर कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। विभाग ने इस पर्यावरणीय अपराध के लिए:
- मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO), शिवपुरी
1.कार्यपालन यंत्री, जन स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE)
के खिलाफ आधिकारिक अभियोजन (मुकदमा) दर्ज कराने हेतु सक्षम अधिकारियों से औपचारिक अनुमति मांगी है। यदि समय रहते सीवेज का प्रवेश नहीं रोका गया, तो सांख्य सागर का पारितंत्र पूरी तरह नष्ट हो जाएगा।

