शिवपुरी,
शिवपुरी (HRIDAY STAMBH);
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित शिवपुरी की वित्तीय स्थिति को पटरी पर लाने और दीर्घकालिक बकाया ऋणों की शत-प्रतिशत वसूली सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा (IAS) ने सहकारी बैंक की शिवपुरी शाखा से लोन लेकर वर्षों से दबाकर बैठे
डिफाल्टर्स पर सीधा प्रशासनिक प्रहार किया है।
प्रशासनिक जांच में चिन्हित ऐसे बकायादार, जिनके पास पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार शस्त्र लाइसेंस (Arm Licences) स्वीकृत हैं, उन्हें अंतिम 7 दिवस का कारण बताओ नोटिस थमाया गया है। तय समयावधि में बैंक का कर्ज चुकता न करने की स्थिति में संबंधितों के शस्त्र लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित एवं निरस्त (Cancel) कर दिए जाएंगे।
क्या है पूरा मामला?
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की शिवपुरी शाखा से बड़े पैमाने पर कृषि व व्यक्तिगत ऋण बांटे गए थे। कई बड़े एवं रसूखदार खाताधारकों ने निर्धारित समयावधि बीत जाने के बाद भी बैंक में राशि जमा नहीं कराई।
बकायादारों की इस लापरवाही के कारण सहकारी बैंक को न केवल वित्तीय संकट (Financial Crunch) का सामना करना पड़ रहा था, बल्कि इसका सीधा असर बैंक के नियमित व आम खाताधारकों के भुगतान और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) से जुड़ी योजनाओं पर भी पड़ रहा था। बैंक की ओर से बार-बार नोटिस जारी किए जाने के बाद भी जब बकाए की वसूली नहीं हो सकी, तो मामला कलेक्टर न्यायालय तक पहुंचा।
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कर्ज नहीं तो हथियार नहीं’ — प्रशासन की नई रणनीति
आमतौर पर बैंक बकाएदारों से वसूली के लिए कुर्की या अचल संपत्ति की जब्ती जैसी पारंपरिक प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं। लेकिन ग्वालियर-चंबल अंचल में शस्त्र (हथियार) को सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता है।
इसी मनोवैज्ञानिक और प्रशासनिक पहलू को ध्यान में रखते हुए Collector Arpit Verma ने वसूली की नई रणनीति तैयार की है।
क्रॉस वेरिफिकेशन कर बैंक के डिफॉल्टर्स की सूची का मिलान पुलिस विभाग के शस्त्र लाइसेंस रजिस्टर से कराया गया।
शिवपुरी शहर सहित जिले के रन्नौद, बैराड़, पोहरी, कोलारस, करैरा, दिनारा, इंदार, पिछोर, देहात और खनियाधाना थाना क्षेत्रों के चिन्हित लाइसेंसधारियों को नोटिस की जद में लिया गया है।
प्रशासनिक संदेश: “यदि किसी व्यक्ति के पास निजी शस्त्र रखने का सामर्थ्य और शौक है, तो वह बैंक का जनहित से जुड़ा बकाया ऋण दबाकर नहीं बैठ सकता। शस्त्र लाइसेंस लोक व्यवस्था और सदाचार के अधीन दिया जाता है, और वित्तीय धोखाधड़ी या जानबूझकर डिफाल्टर बनना प्रशासनिक मापदंडों के विपरीत है।”
7 दिन का अल्टीमेटम, आगे क्या होगा?
कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस में स्पष्ट उल्लेख किया गया है:
7 दिन की अंतिम समयावधि: नोटिस प्राप्त होने के 7 दिवस के भीतर बकाया मूलधन और ब्याज राशि बैंक खाते में जमा कराकर रसीद प्रस्तुत करनी होगी। शस्त्र जब्ती व निरस्तीकरण: यदि तय अवधि में राशि जमा नहीं होती है, तो आयुध अधिनियम (Arms Act) के तहत लाइसेंस निरस्त कर संबंधित पुलिस थाने में हथियार जमा कराने के सख्त निर्देश जारी किए जाएंगे।
बकाएदारों में मचा हड़कंप
प्रशासन के इस अप्रत्याशित और सख्त कदम से जिलेभर के बड़े डिफाल्टर्स में खलबली मच गई है। बैंक सूत्रों का कहना है कि नोटिस जारी होते ही कई बकायादारों ने अपनी देनदारियों का हिसाब-किताब चुकता करने के लिए शाखा में संपर्क साधना शुरू कर दिया है।
कलेक्टर अर्पित वर्मा की इस पहल से न केवल जिला सहकारी बैंक की वित्तीय सेहत सुधरेगी, बल्कि जिले के अन्य बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए भी वसूली का यह मॉडल नजीर साबित हो सकता है।
