शिवपुरी
शिवपुरी(HRIDAY STAMBH);
रोहिणी-मृगशिरा नक्षत्र और शिव योग का बन रहा विशेष संयोग, पहली बार व्रत रखने वाली नवविवाहित महिलाएं भी बिना किसी धार्मिक बाधा के कर सकेंगी व्रत
शिवपुरी। पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना को लेकर सुहागिन महिलाएं गुरुवार, 29 अक्टूबर को करवा चौथ का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाएंगी। इस दिन महिलाएं सुबह से ही अपने पति की लंबी उम्र की कामना के साथ निर्जला व्रत रखेंगी। पूरे दिन बिना अन्न और जल ग्रहण किए रहने के बाद शाम को विधि-विधान से करवा माता की पूजा-अर्चना करेंगी और रात में चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य देने के बाद पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत का पारण करेंगी।
इस बार शिवपुरी में करवा चौथ के दिन चंद्रमा के दर्शन के लिए महिलाओं को रात 8 बजकर 25 मिनट तक इंतजार करना पड़ सकता है। चंद्रोदय का संभावित समय रात 8:25 बजे बताया गया है। ऐसे में दिनभर व्रत रखने वाली महिलाओं की निगाहें शाम होते ही आसमान पर टिकी रहेंगी। चंद्रमा के उदय होते ही महिलाएं छलनी से चंद्र दर्शन करेंगी और उसके बाद अपने पति का चेहरा देखकर उनके हाथों से जल ग्रहण कर व्रत खोलेंगी। हालांकि मौसम और स्थानीय परिस्थितियों के कारण चंद्रमा के वास्तविक दर्शन के समय में कुछ अंतर हो सकता है।
पहली बार व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए भी शुभ अवसर
इस वर्ष करवा चौथ का व्रत पहली बार रखने जा रही नवविवाहित महिलाओं के लिए भी विशेष उत्साह का अवसर है। शादी के बाद पहली बार इस परंपरा को निभाने वाली महिलाओं के मन में अक्सर व्रत की धार्मिक मान्यताओं और शुभ-अशुभ योगों को लेकर कई सवाल रहते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस बार पहली बार करवा चौथ का व्रत रखने में किसी प्रकार की धार्मिक बाधा नहीं है। इसके साथ ही पर्व पर भद्रा और शुक्रास्त का दोष भी नहीं रहेगा। ऐसे में नवविवाहित महिलाएं भी पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ अपना पहला करवा चौथ मना सकेंगी।
आचार्य पं. प्रमोद शास्त्री के अनुसार, शुक्र ग्रह का उदय 28 अक्टूबर की सुबह हो जाएगा। इस कारण 29 अक्टूबर को करवा चौथ के दिन शुक्रास्त का दोष नहीं रहेगा। इसके अलावा इस दिन भद्रा भी नहीं है। धार्मिक दृष्टि से इसे व्रत और पूजन के लिए अनुकूल स्थिति माना जा रहा है।
रोहिणी-मृगशिरा नक्षत्र के साथ शिव योग का संयोग
इस बार करवा चौथ पर रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र के साथ शिव योग का संयोग भी बताया जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, चंद्रमा का अपनी उच्च राशि वृषभ में होना इस पर्व के महत्व को और बढ़ाता है। चंद्रमा को मन, भावनाओं और पारिवारिक सुख का कारक माना जाता है। ऐसे में वृषभ राशि में चंद्रमा की स्थिति को पति-पत्नी के बीच प्रेम, आपसी विश्वास, सौहार्द और रिश्तों में मधुरता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
आचार्य पं. प्रमोद शास्त्री के मुताबिक, करवा चौथ पर बनने वाला यह ज्योतिषीय संयोग दांपत्य जीवन में सुख-शांति और आपसी सामंजस्य की कामना से जुड़े इस पर्व को विशेष बनाता है। महिलाएं इस दिन करवा माता, भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगी।
शाम की पूजा के बाद चंद्रमा को देंगी अर्घ्य
करवा चौथ के दिन सुबह सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करने की परंपरा है। इसके बाद महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को शुभ मुहूर्त में पूजा की तैयारी की जाती है। महिलाएं नए वस्त्र पहनकर सोलह शृंगार करती हैं और पूजा स्थल पर करवा माता की कथा सुनती हैं। कई स्थानों पर महिलाएं सामूहिक रूप से एकत्रित होकर करवा चौथ की कथा सुनने और पूजा करने की परंपरा भी निभाती हैं।
पूजा के दौरान मिट्टी या धातु के करवे में जल भरकर रखा जाता है। करवा माता को रोली, अक्षत, पुष्प, दीप और मिठाई अर्पित की जाती है। इसके बाद चंद्रमा निकलने का इंतजार किया जाता है। चंद्रोदय होने पर महिलाएं छलनी से चंद्रमा के दर्शन कर उन्हें अर्घ्य देती हैं और पति की लंबी उम्र तथा परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करती हैं।
प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है करवा चौथ
करवा चौथ भारतीय संस्कृति में पति-पत्नी के रिश्ते से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह केवल एक दिन का उपवास नहीं, बल्कि दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास, समर्पण और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक भी माना जाता है। समय के साथ इस पर्व का स्वरूप भी बदला है। अब कई स्थानों पर पति भी अपनी पत्नियों के साथ व्रत रखकर इस परंपरा में भागीदारी निभाते हैं।
शिवपुरी सहित आसपास के क्षेत्रों में करवा चौथ को लेकर महिलाओं में उत्साह दिखाई देने लगा है। बाजारों में पूजा सामग्री, करवा, छलनी, साड़ियों, चूड़ियों, मेहंदी और शृंगार सामग्री की खरीदारी का माहौल रहेगा। नवविवाहित महिलाओं के लिए यह पर्व विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा, वहीं वर्षों से व्रत रख रही महिलाएं भी परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ पर्व मनाने की तैयारियों में जुटेंगी।
इस बार भद्रा और शुक्रास्त का दोष नहीं होने तथा विशेष नक्षत्र और योग के संयोग की ज्योतिषीय मान्यताओं के बीच महिलाएं अपने सुहाग की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ करवा चौथ का व्रत रखेंगी।
