मुआवजे के फेर में फंसा किसान: पुश्तैनी जमीन हुई शासकीय दर्ज

शिवपुरी

 

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शिवपुरी(HRIDAY STAMBH);माधव नेशनल पार्क के टाइगर रिजर्व क्षेत्र में विस्थापन और मुआवजे की आस लगाए बैठे एक किसान पर प्रशासनिक लापरवाही भारी पड़ रही है। पुश्तैनी जमीन के कागजातों में अचानक ‘शासकीय’ दर्ज हो जाने से मुआवजा न मिलने से आहत पीड़ित किसान ने मंगलवार को जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर जनसुनवाई में अपनी आपबीती सुनाई। अधिकारियों के चक्कर काट-काटकर पूरी तरह निराश हो चुके किसान ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाते हुए चेतावनी दी है कि यदि उसे उसकी जमीन का हक और मुआवजा नहीं मिला, तो वह अपने मासूम बच्चों के साथ खुदकुशी करने को मजबूर होगा।

​राजस्व रिकॉर्ड की गड़बड़ी से मुआवजा रुका

​पीड़ित किसान का कहना है कि जिस जमीन पर उनका परिवार वर्षों से खेती-बाड़ी कर गुजर-बसर करता आ रहा है, टाइगर रिजर्व प्रक्रिया के दौरान मुआवजा तय करते समय राजस्व रिकॉर्ड में उस जमीन को अचानक सरकारी भूमि दर्शा दिया गया। इस बड़ी तकनीकी गड़बड़ी के कारण प्रशासन ने उसे मुआवजे के दायरे से बाहर कर दिया है। पीड़ित लगातार राजस्व और वन विभाग के दफ्तरों के चक्कर काट रहा है, लेकिन अधिकारी केवल कागजी प्रक्रियाओं का हवाला देकर उसकी मांग को टाल रहे हैं।

​प्रशासनिक गलियारों में मचा हड़कंप, जांच के आदेश

​कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई के दौरान किसान की इस गंभीर चेतावनी के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने राजस्व विभाग को पीड़ित के जमीन संबंधी दस्तावेजों की री-चेकिंग (पुनः जांच) करने और वास्तविक स्थिति का पता लगाकर जल्द रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं, ताकि पीड़ित को उचित न्याय मिल सके और किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

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