अहमदाबाद,
अहमदाबाद(HRIDAY STAMBH);
गुजरात सरकार ने राज्य के सरकारी स्कूलों में सुरक्षा, अनुशासन और विद्यार्थियों की गोपनीयता को पुख्ता करने के उद्देश्य से एक बड़ा और सख्त प्रशासनिक फैसला लिया है। शिक्षा विभाग द्वारा जारी नए दिशानिर्देशों के तहत सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश, फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और सोशल मीडिया लाइव स्ट्रीमिंग पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है।
सरकार के इस कदम के सामने आते ही राज्य की राजनीति में अचानक गर्माहट आ गई है। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) जहाँ इसे छात्रों की सुरक्षा और पढ़ाई के माहौल के लिए आवश्यक कदम बता रही है, वहीं आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों ने इसे सरकार की विफलता छिपाने की कोशिश करार दिया है।
शिक्षा विभाग के नए नियम: क्या बदला?
शिक्षा विभाग की ओर से जारी परिपत्र (Circular) के अनुसार, अब सरकारी स्कूलों के नियमों को कड़ा कर दिया गया है:
- पूर्व लिखित अनुमति अनिवार्य: बच्चों के माता-पिता/अभिभावकों को छोड़कर, किसी भी बाहरी व्यक्ति (मीडिया या अन्य सोशल मीडिया क्रिएटर्स सहित) को स्कूल परिसर में प्रवेश करने से पहले स्कूल के प्रधानाचार्य (प्रिंसिपल) या संस्था प्रमुख से लिखित में पूर्व अनुमति लेनी होगी।
- विजिटर रजिस्टर में एंट्री: स्कूल आने वाले प्रत्येक बाहरी आगंतुक को गेट पर विजिटर रजिस्टर में अपना पूरा विवरण देना होगा, जिसमें नाम, मोबाइल नंबर, पता, आने का स्पष्ट कारण और समय दर्ज करना अनिवार्य होगा।
- संवेदनशील क्षेत्रों में नो-एंट्री: कक्षाओं (Classrooms), साइंस लैब, हॉस्टल और खेल के मैदानों जैसी संवेदनशील जगहों पर बिना अनुमति बाहरी लोगों का जाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
- रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग पर रोक: स्कूल परिसर के अंदर छात्रों या कक्षाओं की तस्वीर खींचने, वीडियो बनाने या किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लाइव स्ट्रीमिंग करने पर पूरी तरह से रोक रहेगी।
बीजेपी का हमला: ‘विपक्ष में दिखी थी रीलबाज और टोलीबाज बीमारी’
इस फैसले के बाद गुजरात बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता डॉ. अनिल पटेल ने सरकार के इस कदम का खुलकर समर्थन किया। विपक्ष पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा:
“पिछले कुछ समय से राज्य के सरकारी स्कूलों में ‘रीलबाज और टोलीबाज’ विपक्ष की बीमारी देखने को मिल रही थी। कुछ लोग अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए बिना अनुमति स्कूलों में घुसपैठ कर रहे थे। विद्यार्थियों की सुरक्षा और उनकी पढ़ाई में बाधा रोकने के लिए यह फैसला लिया गया है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
विपक्ष का पलटवार: ‘बदहाली छिपाने के लिए तानाशाही पाबंदी’
दूसरी तरफ, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने इस फैसले को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार अपनी कमियों और स्कूलों की जर्जर स्थिति को छुपाने की कोशिश कर रही है।
- विपक्ष के मुख्य आरोप:
- स्कूलों की खस्ताहाल इमारतों, बुनियादी सुविधाओं की कमी और प्रशासनिक विफलताओं के जो वीडियो वायरल हो रहे थे, उन्हें दबाने के लिए यह दमनकारी कदम उठाया गया है।
- दिल्ली और पंजाब के पारदर्शी शिक्षा मॉडल का उदाहरण देते हुए विपक्ष ने कहा कि गुजरात सरकार सुधार करने के बजाय तानाशाही रवैया अपना रही है।
- स्कूलों की जमीनी हकीकत उजागर करने वालों को कानूनी कार्रवाई की धमकियां दी जा रही हैं।
निष्कर्ष
सरकारी स्कूलों में रील बनाने, अनधिकृत प्रवेश और वीडियोग्राफी पर लगी इस रोक के बाद गुजरात का सियासी पारा चढ़ गया है। जहाँ प्रशासन इसे छात्रों के हित और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण की दिशा में अहम फैसला मान रहा है, वहीं राजनीतिक गलियारों और शिक्षा जगत में इस पाबंदी के औचित्य पर बहस जारी है।

