ग्वालियर के डबरा में न्याय के लिए संघर्षरत महिला किसान: पैतृक जमीन पर कब्जे के प्रयास और प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ आमरण अनशन की चेतावनी

डबरा/भितरवार

 

डबरा ,

डबरा (HRIDAY STAMBH);

मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले की डबरा तहसील से एक झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ ग्राम सेंतोल की एक महिला किसान पिछले तीन वर्षों से अपनी ही पैतृक जमीन के सीमांकन और नक्शा सुधार के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही है। प्रशासनिक अधिकारियों की कथित अनदेखी और दबंगों द्वारा जमीन पर कब्जा करने की कोशिशों से तंग आकर अब इस महिला ने प्रशासन को खुली चेतावनी दी है। यदि जल्द ही न्याय नहीं मिला, तो वह डबरा तहसील परिसर में आमरण अनशन करने के लिए बाध्य होगी।

तीन साल से दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं शशि जाटव

ग्राम सेंतोल निवासी महिला किसान शशि जाटव (पत्नी हरदास जाटव) अपने पिता की मृत्यु के बाद उत्तराधिकार में मिली पैतृक जमीन के कानूनी हक के लिए लंबी लड़ाई लड़ रही हैं। शशि जाटव का आरोप है कि उन्होंने जमीन के सीमांकन (Demarcation) और नक्शा सुधार के लिए नियमानुसार सभी प्रक्रियाएँ पूरी कीं, यहाँ तक कि निर्धारित सरकारी शुल्क (फीस) भी जमा किया। इसके बावजूद, पिछले तीन वर्षों से राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन के सुस्त रवैये के कारण उनकी फाइल एक टेबल से दूसरी टेबल तक ही घूम रही है।

विवादित सर्वे क्रमांक और दबंगों द्वारा प्रताड़ना के आरोप

महिला किसान के अनुसार, जिन जमीनों को लेकर यह पूरा विवाद खड़ा हुआ है, वे निम्नलिखित सर्वे नंबरों के अंतर्गत आती हैं:
सर्वे क्रमांक: 33/2, 34/2, 39/1, 50/1 और 56/1
शशि जाटव का कहना है कि लंबे समय से सीमांकन न होने के कारण इन जमीनों पर लगातार विवाद की स्थिति बनी हुई है। इसी प्रशासनिक सुस्ती का फायदा उठाकर कुछ स्थानीय दबंग और भू-माफिया किस्म के लोग उनकी जमीन पर अवैध कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। विरोध करने पर ये लोग न केवल उनके साथ अगाली-गलौज और मारपीट करते हैं, बल्कि उन्हें जान से मारने की धमकियाँ भी दी जा रही हैं।

एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, दी आमरण अनशन की चेतावनी

लगातार धमकियों और सरकारी तंत्र की बेरुखी से आहत होकर शशि जाटव ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उन्होंने डबरा के एसडीएम (Sub-Divisional Magistrate) को एक विस्तृत आवेदन सौंपकर अपनी पूरी व्यथा सुनाई है।
आवेदन के माध्यम से उन्होंने माँग की है कि:
1. उनकी पैतृक जमीन का तत्काल और निष्पक्ष सीमांकन कराया जाए।
2. नक्शे में सुधार कर उन्हें उनकी भूमि का वास्तविक कब्जा दिलाया जाए।
3. उन्हें और उनके परिवार को धमकाने वाले उपद्रवियों पर कानूनी कार्रवाई की जाए।
साथ ही, पीड़िता ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर उनकी इन माँगों पर कोई ठोस प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की जाती है, तो वह मजबूर होकर डबरा तहसील परिसर के भीतर ही आमरण अनशन (Hunger Strike) पर बैठ जाएँगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

प्रशासन की कार्यशैली पर खड़े होते सवाल

यह मामला एक बार फिर से ग्रामीण अंचलों में राजस्व विभाग और मैदानी अमले की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जब एक साधारण किसान ने सभी कानूनी औपचारिकताओं और शुल्कों का भुगतान समय पर कर दिया, तब भी उसे न्याय पाने के लिए तीन साल तक इंतजार करना पड़ा।
अब सबकी निगाहें डबरा प्रशासन और ग्वालियर जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वे इस मामले में कितनी जल्दी हरकत में आते हैं, दबंगों के हौसलों पर लगाम कसते हैं, और महिला किसान को उसका हक दिलाकर आमरण अनशन जैसी स्थिति टाल पाते हैं।

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