काठमांडू
105 भारतीय लापता
काठमांडू (NEWS UPDATE): नेपाल के उत्तरी पहाड़ी इलाकों में भोटे कोशी नदी (Bhote Koshi River) में अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही का वो आलम मचाया है। जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी तिब्बत सीमा की ओर से अचानक आए पानी के तेज़ उफान से नुवाकोट, धादिंग और रसुवा (Rasuwa) जिलों के कई गांव और बाज़ार जलमग्न हो चुके हैं। आपदा में भीषण जनहानि हुई है, जबकि सैकड़ों लोग लापता हैं।
हालात की गंभीरता को देखते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से टेलीफोन पर बात करते हुए कहा कि इस मुश्किल वक्त में भारत की ओर से हरसंभव मानवीय सहायता दी जाएगी।
बाढ़ का पानी तिब्बत की ओर से आया और देखते ही देखते नुवाकोट और धादिंग जिलों के कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नेपाली मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, हादसे में कम से कम 16 लोगों की मौत हुई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं।
नेपाल पुलिस के केंद्रीय प्रवक्ता एवं डीआईजी अभि नारायण काफ्ले के अनुसार, नुवाकोट और धादिंग जिलों से अब तक कम से कम आठ शव बरामद किए जा चुके हैं। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
तबाही की मुख्य वजह: तिब्बत में भूस्खलन और बांध का असर?
चीन के तिब्बत में बांधों से ब्रह्मपुत्र और कोसी में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। माना जा रहा है कि नेपाल और भारत में बाढ़ आने की बड़ी वजह यही है।
नेपाल में भोटे कोशी नदी का पानी अचानक उफान पर आ गया। तिब्बत से आई तेज धार ने पुलों को बहा दिया है। बिजली प्लांटों को भी बाढ़ से भारी नुकसान पहुंचा है। कोई गांव जलमग्न हो गए हैं।
चीन ने तिब्बत में कई बड़े बांध पहले ही बना लिए हैं। यारलुंग त्सांगपो नदी पर (भारत में ब्रह्मपुत्र नदी) जांगमू बांध 2015 में पूरा हुआ। उसके बाद जिएक्सू और जियाचा बांध भी आ गए। ये सब ऊर्जा सुरक्षा के लिए हैं। लेकिन सबसे विवादित योजना मेडोग काउंटी में सुपर बांध की है।
105 भारतीय समेत 384 लोग लापता
नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से कुल 384 यात्रियों के लापता होने की सूचना है। इनमें 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। लापता विदेशी नागरिकों में 105 भारतीय बताए गए हैं।
इसके अलावा, रसुवा जिले में नेपाल पुलिस के कम से कम 26 जवानों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। सशस्त्र पुलिस बल के भी सात जवानों के लापता होने की पुष्टि हुई है।
राहत और बचाव कार्य तेज़: नेपाल सेना मैदान में
नेपाल सेना और पुलिस बल की मदद से रेस्क्यू हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं। हालांकि, पानी के तेज बहाव और लगातार खराब मौसम के कारण रेस्क्यू टीमों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।
नेपाल सरकार ने सभी घायलों के मुफ्त इलाज के आदेश दिए हैं और आपातकालीन राहत केंद्र एक्टिव कर दिए हैं।
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