ग्वालियर,
ग्वालियर(HRIDAY STAMBH);
मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में खनिज परिवहन व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। अब जिले में खनिज से लदे ओवरलोड और बिना रॉयल्टी के अवैध रूप से दौड़ने वाले ट्रकों पर इंसानी निगरानी के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक का शिकंजा कसेगा। खनिज विभाग ने इसके लिए कमर कस ली है और नेशनल हाईवे के फास्टैग की तर्ज पर रेडियो फ्रिक्वेंसी (RF) टैग अनिवार्य कर दिए गए हैं।
कैसे काम करेगा यह नया AI-बेस्ड सिस्टम?
यह पूरी तकनीक नेशनल हाइवे पर चलने वाले इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (FASTag) की तर्ज पर काम करेगी:
- ऑटोमेटेड सेंसर स्कैनिंग: गिट्टी, पत्थर या अन्य खनिज सामग्री से भरा कोई भी डंपर या ट्रक जैसे ही बिलौआ या बिजौली स्थित ई-चेकगेट से गुजरेगा, वहां लगे हाई-टेक ऑटोमेटेड सेंसर वाहन की विंडशील्ड पर लगे आरएफ टैग को पलक झपकते ही स्कैन कर लेंगे।
- कंट्रोल रूम तक पहुंचेगी पल-पल की जानकारी: टैग स्कैन होते ही वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर, स्वीकृत रॉयल्टी, ले जाए जा रहे खनिज का प्रकार और धर्मकांटे (वेब्रिज) पर दर्ज वजन जैसी तमाम महत्वपूर्ण जानकारियां सीधे विभाग के मुख्य कंट्रोल रूम तक पहुंच जाएंगी।
- दूसरे जिलों में भी होगी पहचान: इस आरएफ टैग की सबसे बड़ी खूबी यह है कि एक बार वाहन पर टैग लग जाने के बाद उसकी पहचान और ट्रैकिंग सिर्फ ग्वालियर ही नहीं, बल्कि दूसरे जिलों में भी आसानी से की जा सकेगी।
पहले चरण में 900 टैग मिले, ट्रांसपोर्टर्स में सुगबुगाहट
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत पहले चरण में विभाग को 900 रेडियो फ्रिक्वेंसी (RF) टैग मिल चुके हैं। योजना की गंभीरता को देखते हुए ट्रांसपोर्टर्स ने भी शुरुआती दो दिनों के भीतर ही 7 टैग खरीद लिए हैं। खनिज विभाग जल्द ही एक विशेष अभियान चलाकर सभी खनिज परिवहन वाहनों में इन टैग्स को पूरी तरह अनिवार्य करने जा रहा है।
बिलौआ चेकपोस्ट के बाद राजस्व में जबरदस्त उछाल
माननीय उच्च न्यायालय (High Court) के सख्त आदेशों के बाद बिलौआ में विशेष चेकपोस्ट का निर्माण किया गया था। इस चेकपोस्ट के शुरू होने से अवैध और बिना रॉयल्टी के चलने वाले ट्रकों की आवाजाही पर काफी हद तक लगाम लगी है, जिससे शासन के राजस्व में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
आंकड़ों के मुताबिक, पहले जहां बड़ी संख्या में अवैध ट्रक गुजरते थे, वहीं अब सख्ती के बाद बिलौआ में प्रतिदिन केवल 250 से 300 ट्रक ही पहुंच रहे हैं।
टैग से छेड़छाड़ या हटाने पर होगी कड़ी कार्रवाई
खनिज विभाग द्वारा जारी किए गए सख्त दिशा-निर्देशों के अनुसार:
- वाहन स्वामी की जिम्मेदारी: आरएफ टैग का रखरखाव पूरी तरह से वाहन मालिक (ऑपरेटर) की जिम्मेदारी होगी।
- टैग हटाने या क्षतिग्रस्त करने पर प्रतिबंध: यदि कोई चालक या वाहन स्वामी सेंसर की निगरानी से बचने के लिए टैग को निकालता है, उसे निष्क्रिय (deactivate) करता है या क्षतिग्रस्त करता है, तो उस वाहन को तत्काल प्रभाव से खनिज परिवहन के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।
- पंजीयन निरस्त: नियमों का उल्लंघन करने पर ई-खनिज पोर्टल पर दर्ज वाहन का पंजीयन (Registration) भी हमेशा के लिए निरस्त किया जा सकता है।
- खर्च वाहन मालिक का: इन टैग्स को खरीदने का पूरा वित्तीय भार वाहन मालिक को ही उठाना होगा।
अधिकारियों का बयान
”आरएफ टैग लगाने के लिए जल्द ही एक व्यापक अभियान चलाया जाएगा। जिले में खनिज का परिवहन करने वाले सभी ट्रकों में इसे अनिवार्य कर दिया गया है। जो वाहन मालिक एक महीने के भीतर अपने वाहनों में टैग नहीं लगवाएंगे, उनके खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।”
— पंकजध्वज मिश्रा, जिला खनिज अधिकारी, ग्वालियर
ग्वालियर प्रशासन और खनिज विभाग की यह पहल अवैध खनन, ओवरलोडिंग और टैक्स चोरी पर नकेल कसने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकती है। एआई और डिजिटल ट्रैकिंग के आ जाने से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा और राज्य सरकार के राजस्व में भी और अधिक इजाफा होने की पूरी उम्मीद है।

