शिवपुरी
धनेश्वर महादेव नामक यह स्थान शिवपुरी शहर से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित है
शिवपुरी झांसी राजमार्ग पर शहर से लगभग 30 किलोमीटर दूर अमोला पुल ख़त्म होते ही अमोलपठा को जाने वाली रोड पर अमोलपठा से तीन किलोमीटर पहले उडवाया नामक गाँव है, इस गाँव से लगभग 3 किलोमीटर कि दूरी पर स्थित है धनेश्वर महादेव। यह स्थान वियाबान घने जंगल में स्थित है। यहाँ भगवान महादेव का एक अत्यंत प्राचीन मंदिर बना हुआ है, जिसका निर्माण आज से लगभग 200 वर्ष पूर्व स्टेट समय में आमोल में रहने वाले एक व्यक्ति बोहरे जी के द्वारा करवाया गया था। मंदिर के वर्तमान पुजारी जी ने हमें बताया कि बोहरे एक संपन्न धनवान व्यक्ति थे। लेकिन उनके कोई संतान नहीं थी, एक दिन स्वप्न में भगवान शिव ने साधू वेश में आकर बोहरे को धनेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण कराने को कहा तत्पश्चात बोहरे द्वारा चूने से युक्त मंदिर का निर्माण कराया गया। समीप ही गुफ ा में स्थित शिवलिंग को ही मंदिर में स्थापित कर उस समय प्राण प्रतिष्ठित किया गया। मंदिर निर्माण के पश्चात बोहरे जी को संतान सुख की भी प्राप्ति हुई। धनेश्वर महादेव स्थित शिवलिंग पर चौबीसों घंटों ही प्राकृतिक गौमुख से स्वत: जलाभिषेक होता रहता है ! इस गौमुख के बारे में बताया जाता है कि इसमें पानी एक सरोवर से आता है और बारिश के समय इस गौमुख से अति प्राचीन अवशेष भी निकलते रहते है यहीं समीप में एक चट्टान के नीचे एक जल का सरोवर स्थित है जिसके चारों और कुछ ऋषि मुनिए तपस्वियों के साधना स्थल आज भी दिखाई देते है और इसी सरोवर से निकला जल गौमुख तक पहुंचता है और शिवलिंग का जलाभिषेक होता है। महाभारत काल से भी जुड़ा हुआ है धनेश्वर महादेव का इतिहास, किवदंतियों के अनुसार इस स्थान का सम्बन्ध महाभारत काल से भी है। उन्होंने बताया कि इस सम्पूर्ण क्षेत्र में अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने जगह जगह समय व्यतीत किया है। धनेश्वर महादेव पर भी पांडवों ने कुछ समय व्यतीत किया।
चमत्कारिक है गौमुख से निकलने वाला जल
धनेश्वर महादेव स्थित गौमुख से निकलने वाला जल भी चमत्कारिक है। इस जल के बारे में बताया गया कि इस जल से चर्म रोग सहित अनेकों बीमारियों का इलाज किया जा सकता है। इस जल कि सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जब इसे मुहं में डाला जाता है तो मुहं में से जल कब पेट में चला गया पता ही नहीं चलता है, इतना हल्कापन इस जल में है। जल के बारे में यह भी बतलाया जाता है कि आसपास के क्षेत्र के किसानों कि फ सल में यदि कीड़े लग जाते है तो वह इस जल का उपयोग कीटनाशक के तौर पर करते है एवं किसान बीमार पशुओं के उपचार में भी इसी जल का प्रयोग करते है।
