कैमरून ग्रीन, निकोलस पूरन से लेकर राशिद खान तक—बड़े नाम नहीं दिखा पाए दम, फ्रेंचाइजियों की बढ़ी चिंता
नई दिल्ली । इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) हर साल दुनियाभर के क्रिकेटरों के लिए एक बड़ा मंच होता है, जहां खिलाड़ी अपनी प्रतिभा के दम पर पहचान और मोटी कमाई दोनों हासिल करते हैं। खासकर मिनी ऑक्शन में फ्रेंचाइजियां विदेशी खिलाड़ियों पर भारी निवेश करती हैं, इस उम्मीद में कि वे मैच का रुख पलट देंगे। लेकिन आईपीएल 2026 में कई महंगे विदेशी खिलाड़ी अपनी कीमत के मुताबिक प्रदर्शन करने में नाकाम रहे हैं।
इस सूची में सबसे ऊपर कोलकाता नाइट राइडर्स के ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर कैमरून ग्रीन का नाम है। केकेआर ने उन्हें 25.20 करोड़ रुपये की भारी-भरकम कीमत पर खरीदा था, लेकिन ग्रीन न तो बल्ले से प्रभाव छोड़ पाए और न ही गेंदबाजी में कुछ खास कर सके। उनके खराब प्रदर्शन ने टीम को बड़ा झटका दिया है। वहीं, लखनऊ सुपर जायंट्स के विस्फोटक बल्लेबाज निकोलस पूरन भी उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए हैं। 21 करोड़ रुपये में रिटेन किए गए पूरन ने अब तक खेले 5 मैचों में केवल 42 रन बनाए हैं। लगातार बैटिंग ऑर्डर में बदलाव और दबाव के कारण उनका प्रदर्शन प्रभावित नजर आया।
इंग्लैंड के ऑलराउंडर लियाम लिविंगस्टोन को सनराइजर्स हैदराबाद ने 13 करोड़ रुपये में खरीदा, लेकिन उन्हें सिर्फ एक मैच में मौका मिला, जिसमें वे महज 14 रन ही बना सके। इतनी बड़ी रकम के बावजूद प्लेइंग इलेवन में जगह न बना पाना टीम के लिए चिंता का विषय है।
गुजरात टाइटंस के स्टार लेग स्पिनर राशिद खान भी इस सीजन में फीके नजर आए हैं। 18 करोड़ रुपये में रिटेन किए गए राशिद ने 4 मैचों में सिर्फ 5 विकेट लिए हैं, जबकि बल्ले से भी वे खास योगदान नहीं दे पाए हैं। उनके प्रदर्शन में निरंतरता की कमी साफ दिख रही है।
इसके अलावा दिल्ली कैपिटल्स के ट्रिस्टन स्टब्स भी उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके हैं। 10 करोड़ रुपये में रिटेन किए गए स्टब्स ने 4 मैचों में 109 रन बनाए हैं, लेकिन एक फिनिशर के तौर पर उनका प्रभाव सीमित रहा है।
आईपीएल 2026 की यह स्थिति एक बार फिर दिखाती है कि सिर्फ बड़े नाम और भारी कीमत सफलता की गारंटी नहीं होते। फ्रेंचाइजियों के लिए यह एक सबक भी है कि निवेश के साथ-साथ खिलाड़ियों के फॉर्म और भूमिका पर संतुलन बनाना कितना जरूरी है।

