शिवपुरी,
शिवपुरी(HRIDAY STAMBH);जिले की कोलारस तहसील के ग्राम पड़ोरा सड़क में रहने वाले मोगिया जनजाति के 15 आवासहीन परिवारों को तीन दशक से एक ही स्थान पर रहने के बावजूद अब तक आवासीय पट्टे नहीं मिल सके हैं। अपने अधिकार और आवास की मांग को लेकर ये परिवार लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन हर बार आवेदन और आश्वासन के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। मंगलवार को एक बार फिर इन परिवारों का दर्द जिला स्तरीय जनसुनवाई में सामने आया। परिवारों ने कलेक्टर के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर राजस्व विभाग के जिम्मेदार कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच और आवासीय पट्टे दिलाने की मांग की।
आवेदकों ने आरोप लगाया कि ग्राम पड़ोरा सड़क में पुराने रावत होटल के पीछे मोगिया जनजाति के 15 परिवार पिछले करीब 30 वर्षों से निवास कर रहे हैं। इन परिवारों के पास रहने के लिए कोई दूसरा ठिकाना नहीं है। लंबे समय से एक ही स्थान पर निवास करने के बावजूद उन्हें आवासीय पट्टों का लाभ नहीं मिल पा रहा है। परिवारों का कहना है कि उन्होंने नियमानुसार पट्टे प्राप्त करने के लिए संबंधित विभाग में आवेदन किया था, लेकिन राजस्व अमले की कथित लापरवाही और गलत जांच प्रतिवेदन के कारण उनकी पात्रता का मामला आगे नहीं बढ़ सका।
तीन साल पहले भी एसडीएम को भेजा गया था प्रकरण
आवेदन में परिवारों ने प्रशासनिक स्तर पर हुई पूर्व की कार्रवाई का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार, 19 जुलाई 2023 को पत्र क्रमांक सी-1/2023/443 के माध्यम से उनका प्रकरण अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, कोलारस को भेजा गया था। इसके बाद 31 जुलाई 2023 को तहसीलदार कोलारस ने पात्र हितग्राहियों के आवासीय पट्टों के संबंध में सात दिन के भीतर सर्वेक्षण कराने के निर्देश दिए थे।
इतना ही नहीं, 14 अगस्त 2025 को भी संबंधित राजस्व अमले को मामले की जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था। इसके बावजूद अब तक इन परिवारों को आवासीय पट्टे नहीं मिल सके हैं। परिवारों का सवाल है कि जब प्रशासनिक स्तर पर सर्वेक्षण और जांच के निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके थे, तो फिर वर्षों बाद भी उनकी समस्या का निराकरण क्यों नहीं हुआ?
पटवारी पर रुपये मांगने और गलत रिपोर्ट देने का आरोप
इस पूरे मामले में आवेदकों ने तत्कालीन हल्का पटवारी रामवीर रावत की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। परिवारों का आरोप है कि पटवारी द्वारा कथित तौर पर उनसे रुपये की मांग की गई थी। रुपये नहीं देने के कारण उनके पक्ष में सही जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे आवासीय पट्टे स्वीकृत होने की प्रक्रिया प्रभावित हुई।
आवेदकों ने आरोप लगाया कि यदि राजस्व अमले द्वारा निष्पक्ष तरीके से मौके का निरीक्षण और वास्तविक स्थिति के आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाती तो संभवतः अब तक उनके आवासीय पट्टों का मामला आगे बढ़ चुका होता। हालांकि, पटवारी पर लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में संबंधित कर्मचारी का पक्ष और प्रशासनिक जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
तीन बार जनसुनवाई में पहुंचने के बाद भी नहीं मिला न्याय
पीड़ित परिवारों का कहना है कि वे अपनी समस्या को लेकर लगातार प्रशासन के सामने गुहार लगा रहे हैं। इसके लिए उन्होंने 2 दिसंबर 2025, 12 मई 2026 और 22 सितंबर 2026 को भी जनसुनवाई में आवेदन देकर अधिकारियों को अपनी परेशानी से अवगत कराया था। इसके बावजूद उन्हें अब तक कोई ठोस राहत नहीं मिली।
परिवारों ने हाल ही में निरीक्षण के लिए पहुंचे राजस्व कर्मचारी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि संबंधित कर्मचारी मौके पर पहुंचा, लेकिन समुचित निरीक्षण और वास्तविक स्थिति का आकलन किए बिना ही वापस लौट गया। इससे परिवारों को आशंका है कि एक बार फिर उनकी समस्या को गंभीरता से लिए बिना औपचारिक जांच प्रतिवेदन तैयार कर दिया जाएगा।
बिजली और नल कनेक्शन होने के बावजूद पट्टों का इंतजार
आवेदन में परिवारों ने एक महत्वपूर्ण तथ्य का उल्लेख करते हुए बताया कि उनके निवास स्थल पर बिजली कनेक्शन उपलब्ध हैं और जलापूर्ति के लिए नल कनेक्शन भी स्वीकृत हैं। इसके बावजूद उन्हें आवासीय पट्टे नहीं मिलने के कारण विभिन्न सरकारी आवास योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी हो रही हैपरिवारों का कहना है कि वे लंबे समय से इसी स्थान पर अपने परिवारों के साथ रह रहे हैं। उनके पास रहने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। ऐसे में आवासीय पट्टे नहीं मिलने से उनके सामने भविष्य में भी आवास की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। उन्होंने स्थानीय स्तर पर भेदभाव किए जाने की शिकायत भी प्रशासन से की है।
अब कलेक्टर से कार्रवाई की उम्मीद
मंगलवार को जनसुनवाई में आवेदन प्रस्तुत कर मोगिया जनजाति के 15 परिवारों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही कथित रूप से गलत जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने वाले जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने और पात्र परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवासीय पट्टे दिलाने की मांग की है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि करीब 30 वर्षों से एक ही स्थान पर निवास कर रहे इन परिवारों की पात्रता का वास्तविक परीक्षण कब होगा? क्या जिला प्रशासन पुराने आदेशों और पूर्व में की गई शिकायतों के आधार पर जवाबदेही तय करेगा या फिर यह मामला भी अन्य आवेदनों की तरह फाइलों में ही उलझकर रह जाएगा?
फिलहाल 15 मोगिया जनजाति के परिवारों की उम्मीद जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है। उन्हें इंतजार है कि उनकी शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो और वर्षों से लंबित आवासीय पट्टों का मामला आखिरकार किसी नतीजे तक पहुंचे।
