शिवपुरी,
शिवपुरी(HRIDAY STAMBH);जिले में वन संपदा और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले वन विभाग की निगरानी व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शिवपुरी में रेंज ऑफिस के ठीक सामने से लकड़ी और पत्थरों से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली खुलेआम गुजरते दिखाई दे रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारियों के कार्यालय के सामने से हो रहे इस परिवहन ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रेंज ऑफिस के सामने से गुजरते वाहन, निगरानी पर उठे सवाल
हैरानी की बात यह है कि जिस मार्ग से लकड़ी और पत्थरों से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली बेधड़क गुजर रहे हैं, वहीं वन विभाग का रेंज कार्यालय स्थित है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब विभागीय अधिकारियों का दफ्तर इतनी करीब है, तब इन वाहनों को रोककर इनके दस्तावेजों का सत्यापन क्यों नहीं किया जा रहा? क्या जिम्मेदार अधिकारियों को इन वाहनों की आवाजाही की खबर नहीं है, या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है?
लकड़ी और पत्थरों के परिवहन की वैधता पर संशय
वन क्षेत्रों से लकड़ी की कटाई, परिवहन और पत्थरों का दोहन नियमानुसार वैध अनुमति व निर्धारित प्रक्रियाओं के अधीन होता है।
- लकड़ी परिवहन: ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में ले जाई जा रही लकड़ी कहां से काटी गई है और क्या इसके लिए वैध टीपी (परिवहन अनुमति) ली गई है, इसकी जांच जरूरी है।
- पत्थरों का परिवहन: पत्थरों से भरे ट्रॉलियों के मामले में खनिज उत्खनन की जगह, वैध अनुमति और रॉयल्टी संबंधी दस्तावेजों की जांच होना आवश्यक है।
यदि परिवहन वैध है तो विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि बिना अनुमति के अवैध कारोबार चल रहा है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।
कागजी कार्रवाई तक सीमित वन विभाग?
स्थानीय लोगों का कहना है कि वन विभाग का मुख्य कार्य केवल कार्यालयों में बैठकर औपचारिकताएं निभाना नहीं, बल्कि जंगलों की सुरक्षा, अवैध कटाई पर रोक और खनिज माफिया पर नकेल कसना है। रेंज ऑफिस के सामने से ही बिना जांच के गुजरते संदिग्ध वाहन विभागीय सतर्कता की पोल खोल रहे हैं।
उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग
मामला सामने आने के बाद अब वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से अपेक्षा की जा रही है कि वे तुरंत संज्ञान लें और संबंधित रेंज क्षेत्र में जांच टीम भेजें।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि:
- वाहनों के अनुमति पत्रों और रॉयल्टी दस्तावेजों की गहनता से जांच की जाए।
- यदि परिवहन अवैध पाया जाता है, तो वाहन मालिकों, चालकों और संलिप्त लोगों पर कड़ी वैधानिक कार्रवाई हो।
- निगरानी में लापरवाही बरतने वाले मैदानी अमले की जवाबदेही तय की जाए।
फिलहाल, रेंज दफ्तर के सामने से गुजरती ये तस्वीरें वन विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा रही हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर कोई सख्त कदम उठाता है या मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।

