करेरा ब्रेकिंग
भू-माफियाओं की साज़िश के खिलाफ लामबंद हुए पत्रकार, एसडीओपी को सौंपा ज्ञापन
एक महीने पहले एसडीएम द्वारा घोषित अवैध कॉलोनी, उस पर रिश्वत का झूठा आरोप लगाने वाले तीन शिकायतकर्ताओं पर एफआईआर की मांग
करैरा (HRIDAY STAMBH)- ग्राम खैराघाट के महाभ्रष्टाचार और अवैध भू-माफियाओं के खिलाफ सच की आवाज बुलंद करने वाले निर्भीक पत्रकार को झूठे मुकदमे में फंसाने की साजिश के विरोध में आज करैरा अनुभाग के समस्त पत्रकार लामबंद हो गए हैं। ‘पत्रकार संघ’ के बैनर तले करैरा और नरवर अनुभाग के दर्जनों पत्रकारों ने एकजुट होकर अनुविभागीय अधिकारी पुलिस (एसडीओपी) करैरा डॉ. आयुष जाखड़ को ज्ञापन सौंपा पत्रकारों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि पुलिस ने गुमराह करने वाले कथित कॉलोनाइजरों पर तत्काल मुकदमा दर्ज नहीं किया,तो जिला स्तर पर पत्रकार आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे
क्या है पुरा मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पत्रकार संघ ने SDOP करैरा को सौंपे आवेदन में बताया कि ग्राम खैराघाट स्थित सर्वे नंबर 622/2 (रकबा 0.9000 हेक्टेयर) की सरकारी व प्रतिबंधित भूमि पर कॉलोनाइजर संजीव कुमार श्रीवास्तव, ब्रजेश परिहार, साहब बाबा आग्रे व उनके सहयोगियों द्वारा बिना सक्षम प्रशासनिक अनुमति के अवैध ग्रामीण कॉलोनी काटी जा रही थी
जो कि गत 22 अप्रैल 2026 को सक्षम राजस्व न्यायालय (एसडीएम व तहसीलदार करैरा) द्वारा उक्त भूमि के खसरा कॉलम नंबर 12 में “अवैध कॉलोनी” दर्ज करने व नामांतरण/विभाजन पर पूरी तरह से वैधानिक रोक ( लगा दी गई थी। पर पटवारी द्वारा एक माह बाद भी खसरे मैं इसकी प्रविष्टि नही की गई इसी प्रशासनिक विफलता को लेकर पत्रकार कुँवर दारा सिंह भदौरिया (ब्यूरो चीफ, दैनिक प्रदेश खबरदार) लगातार साक्ष्यों के साथ समाचार प्रकाशित कर रहे थे।
कमिश्नर की शिकायत से बौखलाए माफिया, रची घिनौनी साजिश
पूरा मामला ग्राम खैराघाट के सर्वे नंबर 622/2 पर काटी जा रही अवैध कॉलोनी से जुड़ा है। जब स्थानीय प्रशासन और पटवारी की मिलीभगत के खिलाफ सजग पत्रकारिता करते हुए इस महाभ्रष्टाचार की पूरी कुंडली साक्ष्यों के साथ ग्वालियर कमिश्नर के दरबार में पहुंचाई गई, तो अवैध कॉलोनाइजरों के पैरों तले जमीन खिसक गई। खबरों को रुकवाने और पुलिस प्रशासन को गुमराह करने के इरादे से कॉलोनाइजर संजीव कुमार श्रीवास्तव, ब्रजेश परिहार और साहब बाबा आंग्रे ने दिनांक 23 मई 2026 को थाना करैरा में पत्रकार के खिलाफ ₹1,00,00/– की झूठी रिश्वत मांगने का मनगढ़ंत शिकायती आवेदन दे डाला।
कानूनी रूप से पूरी तरह ‘शून्य’ हैं भू – माफियाओ का आरोप
पत्रकारों ने एसडीओपी को सौंपे ज्ञापन में दस्तावेजी सबूतों के साथ स्पष्ट किया कि भू-माफियाओं द्वारा लगाया गया आरोप पूरी तरह से फर्जी और कानूनी रूप से खोखला है। जिस नामांतरण को रुकवाने की धमकी देकर पैसे मांगने का दावा माफिया कर रहे हैं, उस नामांतरण और क्रय-विक्रय पर सक्षम राजस्व न्यायालय (एसडीएम करैरा) द्वारा दिनांक 22 अप्रैल 2026 को ही आधिकारिक रोक (स्टे) लगाई जा चुकी थी। जब कार्य एक महीने पहले ही सरकारी तौर पर प्रतिबंधित हो चुका है, तो उसके नाम पर मई महीने में वसूली का आरोप स्वतः ही दुर्भावनापूर्ण और रंजिशवश गढ़ा हुआ साबित होता है।इस मामले में त्वरित और निष्पक्ष कार्यवाही करते हुए झूठा आवेदन देने वाली तिकड़ी पर केस दर्ज नहीं किया गया, वही पत्रकारों ने साफ कहा कि जल्द कार्यवाही नही होने स्थिति मैं अनुभाग के सभी पत्रकार साथी शिवपुरी पहुंचकर पुलिस अधीक्षक के समक्ष प्रस्तुत होंगे
एसडीओपी डॉ. आयुष जाखड़ ने दिया जल्द जांच का भरोसा
डॉ. आयुष जाखड़ ने मामले की गंभीरता को समझा और पत्रकारों को आश्वस्त किया कि इस पूरे प्रकरण की जल्द से जल्द निष्पक्ष जांच की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी निष्पक्ष पत्रकार को दुर्भावनापूर्ण तरीके से परेशान नहीं होने दिया जाएगा और जांच के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त वैधानिक कदम उठाए जाएंगे।
