नई दिल्ली
इंजन खराब होने का दावा: अफवाह या हकीकत?
नई दिल्ली (News update): देशभर में ई-20 पेट्रोल (20% एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल) के बढ़ते कदम के साथ ही वाहन मालिकों के मन में कई तरह के सवाल और आशंकाएं तैर रही हैं।
सोशल मीडिया से लेकर आम चर्चाओं में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है—क्या 2023 से पहले बनी कारों में E-20 पेट्रोल डलवाने से उनका इंजन सीज या खराब हो जाएगा?
अगर आपके पास भी पुरानी पेट्रोल कार है और आप इस बात को लेकर परेशान हैं, तो यह खबर आपके काम की है। आइए जानते हैं इस पूरे मामले का सच और इससे जुड़े भ्रम।
इंजन खराब होने का दावा: सच या सिर्फ अफवाह?
विशेषज्ञों और वाहन निर्माताओं का कहना है कि इस विषय पर कई दावे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए जा रहे हैं और इंजन खराब होने की आशंका का कोई व्यापक वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है। ऑटोमोबाइल कंपनियों के अनुसार, 2023 से पहले बनी अधिकांश पेट्रोल कारें भी ई-20 ईंधन पर सुरक्षित रूप से चल सकती हैं।
हालांकि, एथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल से कम होने के कारण माइलेज में लगभग 3 से 3.5 प्रतिशत तक कमी आ सकती है।
इसका मतलब यह नहीं है कि इंजन को नुकसान होगा, बल्कि प्रति लीटर ईंधन से मिलने वाली दूरी थोड़ी कम हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वाहन का नियमित सर्विस शेड्यूल अपनाया जाए और निर्माता द्वारा सुझाए गए रखरखाव नियमों का पालन किया जाए, तो सामान्य परिस्थितियों में ई-20 से इंजन को कोई गंभीर नुकसान नहीं होता।
वहीं, यदि किसी वाहन में पहले से तकनीकी खराबी है या ईंधन की गुणवत्ता खराब है, तो समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, लेकिन इसके लिए केवल ई-20 को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
सरकार का कहना है कि ई-20 पेट्रोल से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी, किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी और कार्बन उत्सर्जन कम होगा। हालांकि, हाल के दिनों में माइलेज और पुराने वाहनों पर असर को लेकर विवाद बढ़ने के बाद सरकार और वाहन कंपनियों से लोगों को स्पष्ट जानकारी देने की मांग भी तेज हुई है।
E20 Petrol Engine Damage
