डबरा
कलेक्टर के आदेश पर बंद किए जा रहे खदानों के रास्ते
डबरा (HRIDAY STAMBH): मध्य प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार मानसून सीजन को देखते हुए प्रदेशभर के साथ-साथ जिले की सभी स्वीकृत और संचालित रेत खदानों से रेत उत्खनन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के नियमों का पालन करते हुए जिला प्रशासन ने 30 जून की मध्यरात्रि से 30 सितंबर 2026 तक के लिए यह रोक लगाई है।
कलेक्टर के सख्त आदेश के बाद खनिज विभाग और स्थानीय पुलिस प्रशासन ने मिलकर अवैध रेत माफियाओं पर नकेल कसने के लिए खदानों की ओर जाने वाले सभी मुख्य रास्तों और पहुंच मार्गों को बंद करना शुरू कर दिया है।
खदानों के रास्ते क्यों किए जा रहे हैं बंद?
प्रशासन का मानना है कि केवल कागजी प्रतिबंध लगाने से अवैध उत्खनन पूरी तरह नहीं थमता। इसलिए इस बार जमीनी स्तर पर सख्त कदम उठाए जा रहे हैं
नदियों और नालों के किनारे स्थित रेत खदानों तक जाने वाले रास्तों पर बड़े-बड़े गड्ढे खोदे जा रहे हैं ताकि भारी डंपर, ट्रक या ट्रैक्टर-ट्रॉली वहां तक न पहुंच सकें।
नदियों में पोकलेन और जेसीबी जैसी भारी मशीनों को उतरने से रोकने के लिए नदी घाटों के मुहानों को मिट्टी और पत्थरों से ब्लॉक किया जा रहा है।
अवैध परिवहन पर लगाम: रास्ते बंद होने से रात के अंधेरे में होने वाली रेत की चोरी और अवैध परिवहन पर 100% तक रोक लग सकेगी।
प्रशासन की चेतावनी
प्रतिबंध की अवधि (30 सितंबर तक) के दौरान यदि कोई भी व्यक्ति या वाहन रेत का अवैध उत्खनन या परिवहन करते हुए पाया गया, तो माइनिंग एक्ट के तहत वाहन को राजसात करने और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मानसून में रेत खनन पर प्रतिबंध क्यों जरूरी है?
हर साल 1 जुलाई से 30 सितंबर तक नदियों से रेत निकालने पर रोक लगाई जाती है। इसके पीछे मुख्य कारण हैं:
यह समय मछलियों और अन्य जलीय जीवों (जैसे घड़ियाल और कछुए) का प्रजनन काल (breeding season) होता है। नदियों में भारी मशीनों के चलने से उनके अंडों और प्राकृतिक आवास को भारी नुकसान पहुंचता है।
मानसून के दौरान नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है। रेत निकालने से नदी के तल में गहरे और असुरक्षित गड्ढे बन जाते हैं, जो बारिश के पानी में दिखाई नहीं देते। ऐसे में बाढ़ या तेज बहाव के समय वहां डूबने से गंभीर हादसे होने का खतरा बना रहता है।
Sand Mining Ban MP
