रतलाम,
रतलाम(HRIDAY STAMBH ); मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए पिछले आठ महीनों से शहर में आतंक का पर्याय बनी कुख्यात ‘चड्डी-बनियान गैंग’ का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गुजरात के दाहोद जिले से गैंग के मास्टरमाइंड सहित तीन मुख्य चोरों और चोरी का माल खरीदने वाले एक सराफा व्यापारी सहित कुल 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
1200 सीसीटीवी कैमरे और 6 दिन की घेराबंदी से खुला राज
रतलाम शहर की विभिन्न कॉलोनियों में लगातार हो रही चोरियों से आम जनता में दहशत का माहौल था। पुलिस अधीक्षक (SP) अमित कुमार के निर्देशन में गठित विशेष टीम ने तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लेते हुए 1200 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के फुटेज का बारीकी से विश्लेषण किया।
सुराग मिलने के बाद रतलाम पुलिस ने गुजरात के दाहोद जिले के जैसावाड़ा थाना क्षेत्र (वाडवा और आम्बली गांव) में दबिश दी और लगातार छह दिनों तक कैंप कर इस शातिर गिरोह को धर दबोचा।
गिरफ्तार आरोपियों की जानकारी
पुलिस अधिकारियों (ASP राकेश पंद्रो और CSP सत्येंद्र घनघोरिया) द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार निम्नलिखित आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है:
- मालाभाई (पिता जोटाभाई उर्फ जोर सिंह मावी) – गिरोह का मास्टरमाइंड (निवासी वाडवा, जैसावाड़ा)।
- कालू (पिता भीमा उर्फ भीमजी, निवासी आम्बली, जैसावाड़ा)।
- नभला (पिता भीमा उर्फ भीमजी, निवासी आम्बली, जैसावाड़ा)।
- मणिशंकर उर्फ पोपटलाल (74 वर्ष) – यह आरोपी चोरों से सोना-चांदी खरीदता था और उन्हें गिरवी रखता था (निवासी आम्बली, जैसावाड़ा)।
- फरार आरोपी: गैंग का एक अन्य सदस्य संजयभाई दलसिंह मावी अभी फरार है, जिसकी तलाश पुलिस कर रही है।
वारदातों का शातिर तरीका (Modus Operandi)
यह गैंग पुलिस को चकमा देने और अपनी पहचान छिपाने के लिए बेहद अजीबोगरीब हथकंडे अपनाती थी:
- मोबाइल फोन बंद रखना: आरोपी गुजरात से निकलने से पहले ही अपने मोबाइल फोन दाहोद में बंद करके छोड़ देते थे, ताकि इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की पकड़ में न आ सकें। वापसी पर ही फोन चालू करते थे।
- चड्डी-बनियान और ग्रीसिंग: वारदात को अंजाम देने से पहले आरोपी केवल चड्डी-बनियान पहनते थे और शरीर पर तेल या ग्रीस मल लेते थे, ताकि यदि कोई पकड़ने की कोशिश करे तो वे हाथ से फिसल जाएं और सीसीटीवी में उनका शारीरिक आकार स्पष्ट न हो सके।
- सप्ताहांत (Weekend) को निशाना: आरोपी अमूमन ट्रेन से शनिवार को रतलाम पहुंचते थे और कॉलोनियों में वारदातों को अंजाम देने के बाद पगडंडियों व खेतों की मेड़ों के रास्ते भाग निकलते थे।
- अंधविश्वास: पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी किसी भी बड़ी वारदात को अंजाम देने से पहले स्थानीय मंदिर में सफलता के लिए मन्नत का धागा बांधते थे।
बरामदगी (मशरूका)
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर लगभग 8 लाख रुपये मूल्य की संपत्ति बरामद की है:
- 1 किलो 200 ग्राम चांदी के आभूषण
- 40 ग्राम सोने के जेवर
- 9,000 रुपये नकद
पुलिस रिमांड और आगे की कार्रवाई
गिरफ्तार सभी आरोपियों को अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है। रिमांड के दौरान शहर में हुई अन्य चोरियों और उनके पुराने आपराधिक इतिहास के बारे में गहराई से पूछताछ की जा रही है। इस पूरी कार्रवाई में औद्योगिक क्षेत्र थाना, माणकचौक थाना और साइबर सेल की टीम की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही।
