मप्र में न वन अमला सुरक्षित, न ही बाघ

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सिस्टम की विफलता और माफिया के खौफ में ‘टाइगर स्टेट’

भोपाल: मध्य प्रदेश, जिसे दुनिया भर में ‘टाइगर स्टेट’ के नाम से जाना जाता है, आज अपने ही रक्षकों और वन्यजीवों की सुरक्षा करने में नाकाम साबित हो रहा है। प्रशासनिक सुस्ती और संसाधनों की कमी के चलते प्रदेश के जंगलों में न तो वनकर्मी सुरक्षित हैं और न ही राष्ट्रीय पशु बाघ। माफियाओं के बढ़ते हौसले और सिस्टम की चुप्पी ने वन विभाग को हाशिए पर धकेल दिया है।

माफिया का तांडव, डंडों के भरोसे बंदूकधारियों से जंग
हाल ही में मुरैना में हुई हृदयविदारक घटना ने प्रशासन की पोल खोल दी है। रेत माफिया ने कर्तव्य पर तैनात वनरक्षक हरकेश गुर्जर को ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचलकर मौत के घाट उतार दिया। यह कोई पहली घटना नहीं है इससे पहले शहडोल में लकड़ी माफिया ने रेंजर और डिप्टी रेंजर सहित पूरी टीम को बंधक बनाकर पीटा था।
प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में माफियाओं का जाल फैला हुआ है:
चंबल (मुरैना, भिंड): बेखौफ रेत माफिया।
शहडोल, बालाघाट, बैतूल: सक्रिय लकड़ी माफिया।
भोपाल, शिवपुरी, छतरपुर: अवैध खनिज और अतिक्रमण माफिया।
छिंदवाड़ा, गुना, रायसेन: मिश्रित माफिया गतिविधियाँ।
आंकड़ों में बदहाली: पद खाली, मौतें जारी
वन विभाग की 31 मार्च 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, विभाग भारी “मैनपावर” की कमी से जूझ रहा है।

जंगलों में मैदानी अमले की भारी कमी के कारण वन्यजीवों की निगरानी भगवान भरोसे है। वनकर्मियों का आरोप है कि उन्हें बिना आधुनिक हथियार और सुरक्षा के माफिया से लड़ने भेज दिया जाता है।
सिफारिशें धूल फांक रहीं, सरकार मौन
वन विभाग के भीतर आक्रोश इस बात को लेकर भी है कि सरकार सुरक्षा के प्रति गंभीर नहीं है।

विशेष बल की मांग: मुरैना वन मंडल ने विशेष सशस्त्र बल की 3 बटालियन मांगी थीं, लेकिन पुलिस मुख्यालय से अब तक कोई जवाब नहीं मिला।
कानूनी कवच का अभाव: महाराष्ट्र और ओडिशा की तर्ज पर मप्र के वनकर्मी भी ‘कानूनी सुरक्षा’ की मांग कर रहे हैं, ताकि मजिस्ट्रेट जांच के बिना उन पर मुकदमे न चलें।
दबी फाइलें: नवंबर 2025 में लटेरी (विदिशा) न्यायिक आयोग की सिफारिशें सरकार को सौंपी गई थीं, जिन्हें अब तक लागू नहीं किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान
मुरैना में वन रक्षक की हत्या के बाद न्यायपालिका ने कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य में अवैध उत्खनन और हरिकेश गुर्जर की हत्या के मामले पर स्वतः संज्ञान लिया है। इस गंभीर विषय पर अगले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी।

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