ग्वालियर
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने 368 उपाधियां बांटकर विद्यार्थियों को दिया राष्ट्रसेवा का संदेश, चित्रकला प्रदर्शनी और पं. अजय पोहनकर के गायन ने मोहा मन
ग्वालियर। कहीं सुरों की मिठास थी, कहीं रंगों में उकेरे सपने और कहीं स्वर्ण पदक के साथ वर्षों की साधना का सम्मान। राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के सप्तम दीक्षांत समारोह में शुक्रवार को प्रतिभा, परंपरा और सृजन का ऐसा संगम दिखाई दिया, जिसने आयोजन को खास बना दिया। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने विद्यार्थियों को 67 स्वर्ण पदक और 368 उपाधियां प्रदान करते हुए कहा कि उपाधि केवल प्रतिभा का प्रमाण नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा का संकल्प भी है।
राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के दत्तोपंत ठेंगड़ी सभागार में आयोजित समारोह में राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा तभी शोभायमान होती है, जब उसमें संस्कृति की संवेदना हो। भारतीय कला और संगीत हमारी पहचान हैं। इनके संरक्षण और संवर्धन के बिना राष्ट्र का सांस्कृतिक विकास अधूरा है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी प्रतिभा और साधना के बल पर भारतीय संस्कृति को विश्व पटल पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएं और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में योगदान दें।
कलाकृतियों में दिखी कल्पनाओं की उड़ान
दीक्षांत समारोह के साथ आयोजित चित्रकला प्रदर्शनी में विद्यार्थियों की रचनात्मकता ने अलग छाप छोड़ी। रंगों की जीवंतता, विचारों की गहराई और कलात्मक अभिव्यक्ति से सजी कलाकृतियों ने दर्शकों को आकर्षित किया। प्रत्येक कलाकृति विद्यार्थियों की कल्पनाशीलता और कला साधना की कहानी कहती नजर आई। राज्यपाल मंगुभाई पटेल, कलेक्टर रुचिका चौहान सहित अतिथियों और अभिभावकों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और विद्यार्थियों की प्रतिभा की सराहना की।
पं. अजय पोहनकर के सुरों से गूंजा सभागार
समारोह के मुख्य अतिथि और प्रख्यात शास्त्रीय गायक पं. अजय पोहनकर ने भजन और ठुमरी की प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। ‘गोविंद जय जय, गोपाल जय जय’ भजन और ‘कैसी ये भलाई कन्हाई’ ठुमरी की प्रस्तुति ने वातावरण को संगीतमय बना दिया। छात्राओं ने भरतनाट्यम और शक्ति आराधना पर आधारित शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत कर समारोह में सांस्कृतिक रंग भर दिए।
दो सत्रों की उपलब्धियों का सम्मान
वर्ष 2024-25 और 2025-26 के विद्यार्थियों को विभिन्न संकायों में 368 उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 14 शोध उपाधियां शामिल हैं। गायन में पांच, तबला में दो और चित्रकला में सात शोध उपाधियां दी गईं। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को विभिन्न स्मृति स्वर्ण पदकों से भी सम्मानित किया गया। समारोह में दीक्षांत स्मारिका 2026 का विमोचन हुआ।
संस्कृति शिक्षा उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी ने विद्यार्थियों को चरित्र निर्माण और निरंतर सीखने का संदेश दिया। प्रदेश के संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि उपाधि प्राप्त करना ज्ञान से साधना, साधना से सृजन और सृजन से राष्ट्रसेवा की ओर बढ़ने का अवसर है। विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे ने विद्यार्थियों से सत्य, कर्तव्य और जनकल्याण के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
समारोह में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरु, पूर्व कुलगुरु, शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक उपस्थित रहे।
