दतिया
दतिया(HRIDAY STAMBH);
शासकीय जमीन पर अवैध कब्जे से लेकर सीसी रोड निर्माण और विद्युत पोल लगाने तक की प्रक्रिया पर उठाए सवाल, भाजपा के ही पार्षद पर लगाए गंभीर आरोप
दतिया। नगर पालिका दतिया में इन दिनों भाजपा के दो पार्षदों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। वार्ड क्रमांक 21 की पार्षद श्रीमती सुभद्रा कमलेश सरगैया ने वार्ड क्रमांक 6 के पार्षद दीपक सोनी पर भ्रष्टाचार, शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे और फर्जी रजिस्ट्री जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग उठाई है। खास बात यह है कि आरोप लगाने वाली और आरोपों के घेरे में आए दोनों पार्षद भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर नगर पालिका पहुंचे हैं। ऐसे में यह मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।
दतिया। नगर पालिका दतिया में इन दिनों भाजपा के दो पार्षदों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। वार्ड क्रमांक 21 की पार्षद श्रीमती सुभद्रा कमलेश सरगैया ने वार्ड क्रमांक 6 के पार्षद दीपक सोनी पर भ्रष्टाचार, शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे और फर्जी रजिस्ट्री जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग उठाई है। खास बात यह है कि आरोप लगाने वाली और आरोपों के घेरे में आए दोनों पार्षद भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर नगर पालिका पहुंचे हैं। ऐसे में यह मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।
मकानों की रजिस्ट्री की जांच कराने की मांग
पार्षद सुभद्रा कमलेश सरगैया ने संबंधित क्षेत्र में हुए जमीन संबंधी दस्तावेजों और रजिस्ट्रियों की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि क्षेत्र के प्रत्येक मकान की रजिस्ट्री और उससे जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से जांच होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संबंधित भूमि का स्वामित्व किसके पास है और कहीं शासकीय जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा तो नहीं किया गया है।
इस मामले में फर्जी रजिस्ट्री के आरोप भी लगाए गए हैं। यदि इन आरोपों में तथ्य सामने आते हैं तो मामला केवल नगर पालिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राजस्व और पंजीयन विभाग की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
इस मामले में फर्जी रजिस्ट्री के आरोप भी लगाए गए हैं। यदि इन आरोपों में तथ्य सामने आते हैं तो मामला केवल नगर पालिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राजस्व और पंजीयन विभाग की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
सीसी रोड निर्माण और विद्युत पोल लगाने पर भी सवाल
मामले में केवल जमीन और रजिस्ट्री ही नहीं, बल्कि क्षेत्र में कराए गए सीसी रोड निर्माण तथा विद्युत पोल लगाए जाने की प्रक्रिया को लेकर भी जांच की मांग की गई है।
इन कार्यों में किन नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया, निर्माण कार्यों की स्वीकृति कैसे मिली और विद्युत पोल लगाने के लिए संबंधित विभाग से क्या अनुमति ली गई, इन सभी बिंदुओं की जांच जरूरी बताई जा रही है।
यदि किसी भी स्तर पर नियमों की अनदेखी या अनियमितता हुई है तो संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका भी तय की जानी चाहिए।
इन कार्यों में किन नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया, निर्माण कार्यों की स्वीकृति कैसे मिली और विद्युत पोल लगाने के लिए संबंधित विभाग से क्या अनुमति ली गई, इन सभी बिंदुओं की जांच जरूरी बताई जा रही है।
यदि किसी भी स्तर पर नियमों की अनदेखी या अनियमितता हुई है तो संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका भी तय की जानी चाहिए।
भाजपा के ही दो पार्षद आमने-सामने, संगठन में भी चर्चा के आसार
इस पूरे मामले का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि दोनों पार्षद एक ही राजनीतिक दल भाजपा से जुड़े हुए हैं। ऐसे में पार्टी के ही दो निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के बीच इस तरह के गंभीर आरोप सामने आने से स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
नगर पालिका में पार्षदों की जिम्मेदारी अपने-अपने वार्डों में विकास कार्यों की निगरानी करने और जनता की समस्याओं को उठाने की होती है। ऐसे में जब निर्वाचित जनप्रतिनिधि ही एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगाते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होना और भी जरूरी हो जाता है।
नगर पालिका में पार्षदों की जिम्मेदारी अपने-अपने वार्डों में विकास कार्यों की निगरानी करने और जनता की समस्याओं को उठाने की होती है। ऐसे में जब निर्वाचित जनप्रतिनिधि ही एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगाते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होना और भी जरूरी हो जाता है।
प्रशासन की जांच से ही सामने आएगी वास्तविकता
फिलहाल सामने आए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। आरोपों को ही किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता। ऐसे में प्रशासन को चाहिए कि संबंधित भूमि के राजस्व रिकॉर्ड, रजिस्ट्री दस्तावेजों, निर्माण कार्यों की स्वीकृति और विद्युत पोल लगाने से जुड़े रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन और नगर पालिका प्रशासन इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए उच्चस्तरीय जांच शुरू करेगा? क्या संबंधित विभागों के अधिकारी दस्तावेजों की जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखेंगे?
दतिया की जनता को आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और सच्चाई सामने आने का इंतजार है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और आरोपों की जांच में कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन और नगर पालिका प्रशासन इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए उच्चस्तरीय जांच शुरू करेगा? क्या संबंधित विभागों के अधिकारी दस्तावेजों की जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखेंगे?
दतिया की जनता को आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और सच्चाई सामने आने का इंतजार है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और आरोपों की जांच में कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं।
