शिवपुरी,
शिवपुरी(HRIDAY STAMBH);
जिले के स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय से चली आ रही अटैचमेंट व्यवस्था पर आखिरकार बड़ी कार्रवाई की गई है। जिला मुख्यालय और अन्य शहरी कार्यालयों में वर्षों से अटैच होकर काम कर रहे डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य कर्मचारियों को अब उनके मूल पदस्थापना स्थलों पर वापस भेजा जा रहा है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. संजय ऋषीश्वर ने अलग-अलग आदेश जारी कर कुल 68 अधिकारियों और कर्मचारियों की अटैचमेंट व्यवस्था समाप्त कर दी है।
स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई को ग्रामीण क्षेत्रों में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने और अस्पतालों में लंबे समय से बनी कर्मचारियों की कमी दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। दरअसल, जिले के कई ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों और उप स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थ डॉक्टरों एवं कर्मचारियों के जिला मुख्यालय या दूसरे शहरी संस्थानों में अटैच होकर काम करने के कारण मूल पदस्थापना वाले स्थानों पर स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की स्थिति बन रही थी। अब विभाग ने ऐसे कर्मचारियों को वापस भेजकर संबंधित संस्थानों में उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करने की पहल की है।
जानकारी के अनुसार, 19 से 21 अक्टूबर 2026 के बीच कलेक्टर की अनुमति से जारी किए गए विभिन्न आदेशों के माध्यम से यह कार्रवाई की गई। इसमें नियमित और संविदा दोनों श्रेणियों के कर्मचारी शामिल हैं। डॉक्टर, नर्सिंग ऑफिसर, फार्मासिस्ट, एएनएम, डाटा एंट्री ऑपरेटर, नेत्र सहायक और बहुउद्देश्यीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता (एमपीडब्ल्यू) सहित विभिन्न पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को उनके मूल कार्यस्थल पर लौटने के निर्देश दिए गए हैं।
तीन ब्लॉक के बीएमओ भी जिला मुख्यालय से हटाए
इस पूरी कार्रवाई में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि करैरा, कोलारस और खनियाधाना के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) को भी उनके मूल पदस्थापना स्थल पर वापस भेजा गया है।
करैरा के बीएमओ डॉ. प्रदीप शर्मा जिला कार्यालय में डीटीओ और डीएचओ-2 का कार्य देख रहे थे। इसी तरह कोलारस के बीएमओ डॉ. सुनील खंडोलिया जिला मुख्यालय पर डीएचओ-1, डीएचओ-3 और डीएमओ की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। वहीं खनियाधाना के बीएमओ डॉ. रोहित भदकारिया जिला मुख्यालय पर डीआईओ के पद पर कार्य कर रहे थे।
अब इन तीनों अधिकारियों को अपनी मूल पदस्थापना यानी संबंधित ब्लॉक में बीएमओ के रूप में जिम्मेदारी संभालने के निर्देश दिए गए हैं।
इस बदलाव का सीधा उद्देश्य ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करना है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन, कर्मचारियों की निगरानी, स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की जिम्मेदारी बीएमओ की होती है। ऐसे में ब्लॉक स्तर पर बीएमओ की नियमित उपलब्धता को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
संविदा डॉक्टरों और कर्मचारियों पर भी गिरी गाज
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई केवल नियमित कर्मचारियों तक सीमित नहीं रही। संविदा आधार पर नियुक्त डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मचारियों की अटैचमेंट भी समाप्त की गई है।
19 अक्टूबर को जारी आदेश क्रमांक 16505 के तहत 14 संविदा डॉक्टरों, नर्सिंग ऑफिसर, फार्मासिस्ट, एएनएम और डाटा एंट्री ऑपरेटरों को उनके मूल पदस्थापना स्थलों पर लौटने के निर्देश दिए गए।
इस सूची में बैराड़ और झिरी जैसे क्षेत्रों में पदस्थ डॉक्टरों के अलावा जिला अस्पताल और टीबी अस्पताल में अटैच होकर सेवाएं दे रहे कर्मचारी भी शामिल हैं।
विभाग का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वीकृत पदों पर नियुक्त कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है। यदि कर्मचारी अपने मूल स्वास्थ्य केंद्रों के बजाय दूसरे संस्थानों में काम करते हैं तो ग्रामीण मरीजों को उपचार के लिए परेशान होना पड़ता है।
33 एमपीडब्ल्यू सहित अन्य कर्मचारियों की भी वापसी
अटैचमेंट समाप्त करने की कार्रवाई के तहत आदेश क्रमांक 16503 और 16504 भी जारी किए गए हैं। इनके माध्यम से नेत्र सहायकों, सहायक ग्रेड-2 के कर्मचारियों और 33 बहुउद्देश्यीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (एमपीडब्ल्यू) सहित अन्य कर्मचारियों को उनके मूल पदस्थापना स्थलों पर भेजने की कार्रवाई की गई है।
इनमें जिला अस्पताल, विभिन्न विभागीय कार्यालयों, कलेक्टर कार्यालय और कोल्ड चेन से जुड़े कार्यों में अटैच होकर सेवाएं दे रहे कर्मचारी शामिल हैं।
इसके अलावा नर्सिंग ऑफिसर, एएनएम और डाटा एंट्री ऑपरेटरों को भी मूल उप स्वास्थ्य केंद्रों पर भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई से जिले के उन ग्रामीण स्वास्थ्य संस्थानों को राहत मिलने की उम्मीद है, जहां कर्मचारियों की उपलब्धता प्रभावित हो रही थी। खासकर उप स्वास्थ्य केंद्रों पर एएनएम और एमपीडब्ल्यू की भूमिका ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण होती है। टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की देखभाल, बच्चों के स्वास्थ्य और विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के संचालन में इनकी जिम्मेदारी रहती है।
पिछोर में दोहरे प्रभार की व्यवस्था भी समाप्त
विभाग ने केवल अटैचमेंट ही नहीं, बल्कि अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था को भी दुरुस्त करने की पहल की है।
डॉ. दीपा दुबे और डॉ. ब्रह्मतीर्थ चतुर्वेदी मूल रूप से करैरा में पदस्थ थे, लेकिन पिछोर में सीबीएमओ का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे। इसी तरह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर पदस्थ डॉ. नारायण सिंह कुशवाह और डॉ. महेंद्र सिंह कुशवाह करैरा तथा नरवर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सीबीएमओ का अतिरिक्त प्रभार देख रहे थे।
अब इन अतिरिक्त प्रभारों को समाप्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस व्यवस्था में बदलाव का उद्देश्य अधिकारियों की जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना और ब्लॉक स्तर पर प्रशासनिक कार्यों का बेहतर संचालन सुनिश्चित करना है। लंबे समय से अतिरिक्त प्रभार के भरोसे चल रही व्यवस्थाओं में जवाबदेही और नियमित निगरानी को लेकर भी चुनौतियां सामने आती रही हैं।
पोहरी में संविदा चिकित्सक से लेकर नियमित डॉक्टर को सौंपी जिम्मेदारी
पोहरी ब्लॉक में भी विभाग ने महत्वपूर्ण बदलाव किया है। आदेश क्रमांक 16692 के तहत प्रभारी प्रमुख खंड चिकित्सा अधिकारी का प्रभार संविदा चिकित्सक डॉ. द्वारिका प्रसाद वर्मा से लेकर नियमित चिकित्सा अधिकारी डॉ. रजत साहू को सौंप दिया गया है।
इस बदलाव को ब्लॉक स्तर पर नियमित चिकित्सा अधिकारियों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।
अब बड़ा सवाल: क्या ग्रामीण अस्पतालों में वास्तव में सुधरेंगी स्वास्थ्य सेवाएं?
स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अटैचमेंट समाप्त होने से ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों और उप स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति में वास्तविक सुधार आएगा?
दरअसल, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर लंबे समय से डॉक्टरों की कमी, पैरामेडिकल स्टाफ की अनुपलब्धता और स्वास्थ्य केंद्रों के नियमित संचालन जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं। कई बार मरीजों को सामान्य उपचार के लिए भी जिला अस्पताल या निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।
ऐसे में 68 अधिकारियों-कर्मचारियों को मूल पदस्थापना पर वापस भेजने का फैसला महत्वपूर्ण है। हालांकि इस कार्रवाई की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित कर्मचारी अपने निर्धारित स्वास्थ्य केंद्रों पर नियमित रूप से सेवाएं देते हैं या नहीं।
साथ ही यह भी जरूरी होगा कि जिन स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों और कर्मचारियों के पद पहले से रिक्त हैं, वहां नई नियुक्तियों के माध्यम से व्यवस्था मजबूत की जाए।
भोपाल में रखी जाएगी जिले की पूरी स्थिति
सीएमएचओ डॉ. संजय ऋषीश्वर ने कहा कि शासन की मंशा ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनके क्षेत्र में ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और उचित उपचार उपलब्ध कराने की है। इसके लिए जरूरी है कि डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य कर्मचारी जिस स्थान पर पदस्थ हैं, वहीं रहकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें।
उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से अटैचमेंट समाप्त करने की कार्रवाई की गई है। जिले में स्वास्थ्य विभाग की संपूर्ण स्थिति से भोपाल में वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा। इसके बाद रिक्त पदों और अन्य व्यवस्थागत जरूरतों के संबंध में राज्य स्तर से निर्णय लिया जाएगा।
कुल मिलाकर शिवपुरी स्वास्थ्य विभाग में 68 अधिकारियों-कर्मचारियों की अटैचमेंट समाप्त करने का यह फैसला ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए अहम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासनिक आदेश जमीन पर कितने प्रभावी साबित होते हैं और ग्रामीण मरीजों को अपने ही क्षेत्र में बेहतर उपचार की सुविधा कितनी मिल पाती है।
