डिप्लोमेसी की नई उड़ान राष्ट्रपति पुतिन

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ब्रिक्स सम्मेलन के लिए फिर भारत आएंगे राष्ट्रपति पुतिन

नई दिल्ली: वैश्विक कूटनीति के केंद्र में एक बार फिर भारत होने वाला है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आगामी ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत का दौरा करेंगे। दिसंबर 2025 की अपनी सफल यात्रा के बाद, पुतिन का यह दौरा भारत-रूस संबंधों की गहराई को दर्शाता है।

ब्रिक्स देशों के नेताओं की यह वार्षिक बैठक सितंबर 2026 के महीने में आयोजित होने की संभावना है। इस सम्मेलन का मुख्य एजेंडा निम्नलिखित विषयों पर केंद्रित रहेगा:

आर्थिक सहयोग: सदस्य देशों के बीच व्यापारिक बाधाओं को कम करना।
भू-राजनीति: वैश्विक संघर्षों और शांति बहाली पर चर्चा।
वैश्विक शासन: अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार की मांग।

ट्रंप प्रशासन की बढ़ सकती है बेचैनी
पुतिन की इस यात्रा पर न केवल भारत, बल्कि दुनिया की महाशक्तियों की भी पैनी नजर है। विशेष रूप से अमेरिका इस दौरे को बारीकी से देख रहा है। पूर्व के घटनाक्रमों को देखें तो डोनाल्ड ट्रंप कई बार भारत को रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर चेतावनी दे चुके हैं। ऐसे में पुतिन का भारत आना और व्यापारिक समझौतों पर चर्चा करना वाशिंगटन के लिए एक कूटनीतिक चुनौती हो सकता है।
ब्रिक्स का विस्तार: अब 5 नहीं, 11 देशों का ‘पावरहाउस’
ब्रिक्स अब पहले से कहीं अधिक शक्तिशाली और व्यापक हो गया है। 2006 में ‘ब्रिक’ (BRIC) के रूप में शुरू हुए इस संगठन का सफर अब

11 देशों तक पहुँच चुका है:
ब्रिक्स अब दुनिया की लगभग 40% से अधिक आबादी और वैश्विक जीडीपी के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है, जिससे यह पश्चिमी प्रभुत्व वाले संगठनों के सामने एक मजबूत विकल्प बनकर उभरा है।भारत के लिए यह सम्मेलन अपनी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ को सिद्ध करने का बड़ा मंच है। एक तरफ जहाँ भारत अमेरिका के साथ मजबूत रक्षा संबंध साझा करता है, वहीं दूसरी तरफ रूस के साथ अपनी पुरानी दोस्ती और ऊर्जा सुरक्षा को बरकरार रखकर यह संदेश देना चाहता है कि वह किसी भी बाहरी दबाव में अपनी विदेश नीति तय नहीं करेगा।

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