​खाकी पर फिर लगा दाग:पुलिस की गुंडागर्दी या रक्षक ही भक्षक?

Chhatarpur

छतरपुर,

छतरपुर(HRIDAY STAMBH);

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। न्याय की उम्मीद में आला अधिकारियों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे एक बेबस दंपति के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा बर्बरता किए जाने का मामला सामने आया है। पीड़ित पति-पत्नी का आरोप है कि उन्हें पुलिस अधिकारियों से मिलने से रोका गया और थाने परिसर के भीतर कार में बंधक बनाकर बेरहमी से पीटा गया।

​आईजी से मिलने पहुंचे थे फरियादी, कार बनी ‘टॉर्चर चैंबर’

​जानकारी के अनुसार, नौगांव जेल रोड निवासी प्रमोद तिवारी और उनकी पत्नी सुषमा तिवारी सोमवार शाम करीब 4 बजे अपनी शिकायत लेकर सिविल लाइन थाना पहुंचे थे। उन्हें सूचना मिली थी कि पुलिस महानिरीक्षक (IG) इरशाद वली छतरपुर दौरे पर हैं और थाने में मौजूद हैं। पीड़ित दंपति का आरोप है कि वहां मौजूद सीएसपी अरुण कुमार सोनी और तत्कालीन नौगांव थाना प्रभारी (टीआई) सतीश सिंह ने उन्हें आईजी से मिलने से रोका।

​कहासुनी बढ़ने पर पुलिसकर्मियों ने प्रमोद तिवारी को जबरन एक कार में बैठाया और कार के शीशे बंद कर लात-घूसों से मारपीट की। इस घटना में टीआई सतीश सिंह, सीएसपी अरुण सोनी, पुलिसकर्मी रुपेश शर्मा और चालक समेत अन्य जवानों पर शामिल होने के आरोप लगे हैं।

​महिला से अभद्रता और मोबाइल छीनने का आरोप

​पीड़ित परिवार का दावा है कि विवाद की वजह एक पुरानी चोरी का मामला है, जिसमें पुलिस अधिकारियों द्वारा रिश्वत लेकर आरोपी को छोड़ने के साक्ष्य उनके पास थे। प्रमोद तिवारी ने आरोप लगाया है कि भ्रष्टाचार से जुड़े वीडियो और सबूतों को मिटाने की नीयत से उनका मोबाइल छीन लिया गया। इसके साथ ही पीड़ित की पत्नी के साथ भी अभद्रता की गई।

​अस्पताल में भर्ती, जांच की मांग

​घटना के बाद गंभीर रूप से घायल प्रमोद तिवारी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। पीड़ित ने पुलिस प्रशासन पर जान से मारने की नीयत से काम करने का आरोप लगाया है। घटना के बाद स्थानीय नागरिकों में भारी रोष है और मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने तथा निलंबन की मांग की जा रही है।

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