गाजा में इंसानियत शर्मसार! संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में इजरायल पर नरसंहार, बलात्कार और युद्ध अपराधों के गंभीर आरोप

देश विदेश

 

नई दिल्ली,

नई दिल्ली(HRIDAY STAMBH);

संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट में दावा- फिलिस्तीनी नागरिकों को जानबूझकर बनाया गया निशाना, वेस्ट बैंक में 254 फिलिस्तीनियों की हवाई हमलों में मौत; अक्टूबर 2025 के संघर्ष विराम के बाद भी गाजा में 1,431 लोगों की जान गई

नई दिल्ली/न्यूयॉर्क। गाजा में इजरायल और फिलिस्तीन के बीच जारी संघर्ष को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग (Independent International Commission of Inquiry) ने 26 अक्टूबर 2026 को सार्वजनिक की गई अपनी नई रिपोर्ट में इजरायल पर युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ गंभीर अपराध करने के आरोप लगाए हैं। आयोग का कहना है कि फिलिस्तीनी नागरिकों को जानबूझकर निशाना बनाया गया और कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों में सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ उत्पीड़न, यातना, बलात्कार तथा अन्य प्रकार की यौन हिंसा की घटनाएं भी सामने आई हैं।

रिपोर्ट का सबसे गंभीर निष्कर्ष यह है कि अक्टूबर 2025 में संघर्ष विराम लागू होने के बावजूद गाजा में फिलिस्तीनियों के खिलाफ कथित नरसंहार संबंधी गतिविधियां पूरी तरह बंद नहीं हुईं। आयोग ने कहा है कि इजरायली अधिकारियों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई में ऐसे कृत्य जारी रहे, जिनका उद्देश्य फिलिस्तीनी आबादी को पूरी तरह या आंशिक रूप से नष्ट करना हो सकता है।

संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि युद्ध विराम के बाद भी आम नागरिकों की जान जा रही है, आवासीय क्षेत्रों में हमले हो रहे हैं और बुनियादी सुविधाएं तबाह हो रही हैं, तो आखिर संघर्ष विराम का वास्तविक लाभ आम लोगों तक क्यों नहीं पहुंच पा रहा है?

फिलिस्तीनी नागरिकों को जानबूझकर निशाना बनाने का आरोप

संयुक्त राष्ट्र जांच आयोग के अनुसार, 7 अक्टूबर 2023 से शुरू हुए संघर्ष के बाद इजरायली सैन्य कार्रवाई में भारी और बिना निर्देशित किए जाने वाले हथियारों का इस्तेमाल घनी आबादी वाले क्षेत्रों में किया गया। इसके अलावा ड्रोन, क्वाडकॉप्टर, तोपखाने और स्नाइपर हमलों के जरिए भी सैन्य कार्रवाई की गई।
आयोग का आरोप है कि इन कार्रवाइयों के कारण आम नागरिकों के जीवन और संपत्तियों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा। आवासीय इमारतें, नागरिक ठिकाने और जरूरी बुनियादी ढांचे लगातार हमलों की चपेट में आए।
रिपोर्ट में कहा गया है कि नागरिकों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में भारी हथियारों का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत गंभीर सवाल खड़े करता है। युद्ध के दौरान सैन्य और नागरिक ठिकानों के बीच अंतर करना तथा आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी है।
आयोग ने अपने निष्कर्षों में इजरायल पर युद्ध अपराधों के साथ मानवता के खिलाफ अपराधों का भी आरोप लगाया है।

यातना, बलात्कार और यौन हिंसा के गंभीर आरोप

रिपोर्ट का सबसे संवेदनशील हिस्सा फिलिस्तीनी नागरिकों और हिरासत में रखे गए लोगों के साथ कथित अमानवीय व्यवहार से जुड़ा है।
जांच आयोग ने इजरायली सुरक्षा बलों और संबंधित अधिकारियों पर यातना, उत्पीड़न, बलात्कार, प्रजनन संबंधी हिंसा और यौन हिंसा के अन्य स्वरूपों में शामिल होने के आरोप लगाए हैं।
आयोग के मुताबिक, ऐसी घटनाएं केवल अलग-अलग मामलों तक सीमित नहीं दिखाई देतीं, बल्कि इनके पीछे फिलिस्तीनी आबादी को भयभीत करने, अधीन रखने और उनके विस्थापन की परिस्थितियां पैदा करने का व्यापक पैटर्न दिखाई देता है।
रिपोर्ट में विशेष रूप से कब्जे वाले वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी नागरिकों के खिलाफ हिंसा, सैन्य अभियानों और बस्तियों से जुड़े लोगों की हिंसक गतिविधियों का उल्लेख किया गया है।
आयोग का कहना है कि महिलाओं, पुरुषों और बच्चों सहित विभिन्न आयु वर्ग के लोगों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आई हैं। बच्चों के खिलाफ हिंसा और उन्हें जानबूझकर गंभीर शारीरिक एवं मानसिक नुकसान पहुंचाने के मामलों को भी रिपोर्ट में गंभीरता से उठाया गया है।

संघर्ष विराम के बाद भी 1,431 लोगों की मौत

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में संघर्ष विराम के बाद गाजा की स्थिति को लेकर भी महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं।

संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) की 2 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, 10 अक्टूबर 2025 को संघर्ष विराम समझौते की घोषणा के बाद से 30 सितंबर 2026 तक गाजा में कम से कम 1,431 फिलिस्तीनियों की मौत और 5,026 लोगों के घायल होने की सूचना दर्ज की गई थी।

इन मृतकों में कम से कम 300 बच्चे और 130 महिलाएं शामिल बताई गई हैं।
आंकड़े बताते हैं कि संघर्ष विराम के बावजूद गाजा के लोगों को हिंसा से पूरी तरह राहत नहीं मिल सकी। हवाई हमलों, तोपखाने की गोलाबारी, ड्रोन हमलों और गोलीबारी की घटनाओं ने नागरिकों की सुरक्षा को लगातार प्रभावित किया।
यह स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि संघर्ष विराम का मूल उद्देश्य युद्ध की विभीषिका को रोकना, नागरिकों की जान बचाना और प्रभावित क्षेत्रों में मानवीय सहायता पहुंचाने का रास्ता खोलना था।
लेकिन संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े बताते हैं कि समझौते के बाद भी गाजा में मौतों और घायलों का सिलसिला जारी रहा।

वेस्ट बैंक में हवाई हमलों से मौतों में भारी वृद्धि

जांच आयोग की रिपोर्ट में गाजा के अलावा वेस्ट बैंक की स्थिति पर भी गंभीर चिंता जताई गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2008 से 6 अक्टूबर 2023 तक वेस्ट बैंक में इजरायली हवाई हमलों में छह फिलिस्तीनियों की मौत दर्ज की गई थी। जबकि 7 अक्टूबर 2023 से 30 सितंबर 2026 के बीच हवाई हमलों में 254 फिलिस्तीनियों की जान चली गई।
आयोग ने इस वृद्धि को बेहद गंभीर बताते हुए कहा है कि वेस्ट बैंक में सैन्य अभियानों और इजरायली बस्तियों से जुड़े लोगों की हिंसक गतिविधियों ने फिलिस्तीनी नागरिकों के लिए हालात और खराब किए हैं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जनवरी 2025 से शुरू हुए सैन्य अभियानों के बाद वेस्ट बैंक में बड़े पैमाने पर विस्थापन हुआ। अगस्त 2026 तक 34,176 फिलिस्तीनी विस्थापित बने हुए थे।
आयोग का आरोप है कि सैन्य कार्रवाई और बस्तियों से जुड़े लोगों की हिंसा को अलग-अलग घटनाओं के रूप में नहीं देखा जा सकता। इनके बीच एक व्यापक और सुनियोजित पैटर्न दिखाई देता है, जिसका असर फिलिस्तीनी आबादी के जीवन, सुरक्षा और अपने क्षेत्र में रहने के अधिकार पर पड़ रहा है।

‘येलो लाइन’ को लेकर भी जताई चिंता

संयुक्त राष्ट्र आयोग ने गाजा में निर्धारित येलो लाइन (Yellow Line) को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है।
रिपोर्ट के अनुसार, संघर्ष विराम के बाद निर्धारित यह रेखा धीरे-धीरे एक वास्तविक सीमा जैसी स्थिति ग्रहण करती दिखाई दे रही है। आयोग का कहना है कि इसके चलते गाजा में इजरायल का क्षेत्रीय नियंत्रण बढ़ा है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि संघर्ष विराम के दौरान इजरायल का नियंत्रण गाजा के लगभग 53 प्रतिशत क्षेत्र से बढ़कर कम से कम 60 प्रतिशत तक पहुंच गया।
आयोग के मुताबिक, येलो लाइन के आसपास पहुंचने या उसे पार करने वाले फिलिस्तीनी नागरिकों के मारे जाने और घायल होने की घटनाएं भी सामने आई हैं।
यह घटनाक्रम संघर्ष विराम की स्थिरता और गाजा के भविष्य को लेकर नए सवाल खड़े करता है।

इजरायल ने रिपोर्ट को बताया दुष्प्रचार

संयुक्त राष्ट्र आयोग के इन निष्कर्षों को इजरायल ने स्वीकार नहीं किया है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल के जिनेवा स्थित मिशन ने संयुक्त राष्ट्र आयोग की रिपोर्ट को गलत सूचनाओं और इजरायल की छवि खराब करने के अभियान का हिस्सा बताया है।
इजरायली पक्ष का कहना है कि इस तरह की रिपोर्टों के जरिए देश की वैधता और आत्मरक्षा के अधिकार को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।
इजरायल लगातार नरसंहार और यौन हिंसा से जुड़े आरोपों को खारिज करता रहा है। उसका पक्ष है कि उसकी सैन्य कार्रवाई सुरक्षा और आतंकवादी हमलों के जवाब में की जा रही है।
इस तरह संयुक्त राष्ट्र आयोग के गंभीर निष्कर्षों और इजरायल के इनकार के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद और गहरा गया है।

पहले भी नरसंहार को लेकर रिपोर्ट जारी कर चुका है संयुक्त राष्ट्र आयोग

गाजा में इजरायल की सैन्य कार्रवाई को लेकर संयुक्त राष्ट्र का जांच आयोग इससे पहले भी कई रिपोर्ट जारी कर चुका है।
सितंबर 2025 में आयोग ने अपनी एक रिपोर्ट में निष्कर्ष दिया था कि गाजा में फिलिस्तीनियों के खिलाफ नरसंहार हुआ है और इजरायली अधिकारियों के बयानों तथा सैन्य कार्रवाइयों की भी जांच की जानी चाहिए।
मार्च 2025 में आयोग ने फिलिस्तीनी बंदियों के साथ कथित यौन और लैंगिक हिंसा को लेकर भी विस्तृत रिपोर्ट जारी की थी।
इससे स्पष्ट है कि फिलिस्तीन का मुद्दा अब केवल इजरायल और हमास के बीच सैन्य संघर्ष तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि मानवाधिकार, अंतरराष्ट्रीय कानून, नागरिकों की सुरक्षा और जवाबदेही जैसे व्यापक सवालों का विषय बन चुका है।

अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका पर नजर

संयुक्त राष्ट्र आयोग की ताजा रिपोर्ट के बाद अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। आयोग ने इजरायल से कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों में अपनी गैरकानूनी मौजूदगी समाप्त करने, बस्तियों से जुड़े विस्तार को रोकने और फिलिस्तीनियों की जमीन तथा संपत्ति पर किए गए कब्जे को समाप्त करने की सिफारिश की है।
रिपोर्ट के निष्कर्ष भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जवाबदेही तय करने और संभावित न्यायिक कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं। हालांकि, आयोग की रिपोर्ट अपने आप में किसी अंतरराष्ट्रीय अदालत का अंतिम फैसला नहीं है।

गाजा में हजारों परिवार पहले ही अपने घर, परिजन और आजीविका गंवा चुके हैं। अस्पताल, स्कूल, पानी और बिजली जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं को भारी नुकसान पहुंचा है। ऐसे में युद्ध विराम को स्थायी शांति में बदलना और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट ने दुनिया के सामने एक बार फिर मानवीय संकट की गंभीर तस्वीर रखी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद गाजा और वेस्ट बैंक में हिंसा पर प्रभावी रोक लग पाएगी या फिलिस्तीनी नागरिकों को अभी भी इसी तरह संघर्ष, विस्थापन और मौत के साये में जीवन गुजारना पड़ेगा?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *