जीवन में आएगा सुख, शांति और पुण्य का प्रकाश
हृदय स्तंभ/HRIDAY STAMBH: सनातन धर्म में अधिक मास को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना गया है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है क्योंकि यह भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। यह मास लगभग तीन वर्ष में एक बार आता है और इसका उद्देश्य व्यक्ति को भक्ति, साधना, दान और आत्मचिंतन की ओर प्रेरित करना होता है। शास्त्रों के अनुसार इस मास में की गई पूजा, जप, तप और दान का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है।
अधिक मास क्यों आता है
हिंदू पंचांग चंद्र मास पर आधारित है जबकि सूर्य वर्ष में दिनों की संख्या अलग होती है। इसी अंतर को संतुलित करने के लिए लगभग हर तीसरे वर्ष एक अतिरिक्त मास जुड़ता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है। यह समय आध्यात्मिक उन्नति और भगवान की आराधना के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
अधिक मास में कौन सी पूजा करनी चाहिए
भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा
अधिक मास में भगवान विष्णु की पूजा सबसे अधिक फलदायी मानी जाती है। प्रतिदिन प्रातः स्नान करके भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण या लक्ष्मी नारायण का पूजन करना चाहिए।
पीले पुष्प अर्पित करें , तुलसी दल चढ़ाएं , घी का दीपक जलाएं
, विष्णु सहस्रनाम या गीता का पाठ करें
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें
तुलसी पूजा
तुलसी माता को भगवान विष्णु की प्रिय माना गया है। अधिक मास में प्रतिदिन तुलसी के समक्ष दीपक जलाकर परिक्रमा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है।
कथा और सत्संग
इस मास में श्रीमद्भागवत कथा, रामायण पाठ, गीता पाठ और भजन-कीर्तन करना अत्यंत शुभ माना गया है। इससे मन की शुद्धि होती है और नकारात्मक विचार दूर होते हैं।
दान-पुण्य
अधिक मास में अन्न, वस्त्र, गौसेवा, जलदान और गरीबों की सहायता विशेष फलदायी मानी गई है। सामर्थ्य अनुसार दान करने से पितरों और देवताओं की कृपा प्राप्त होती है।
अधिक मास में पूजा की विधि
१. प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
२. घर के मंदिर को शुद्ध करें।
३. भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें।
४. चंदन, अक्षत, पुष्प और तुलसी अर्पित करें।
५. घी का दीपक और धूप जलाएं।
६. मंत्र जाप एवं आरती करें।
७. दिन में सात्विक भोजन करें और क्रोध, झूठ व अपशब्दों से बचें।
अधिक मास में क्या नहीं करना चाहिए
तामसिक भोजन से बचना चाहिए
विवाद और अपशब्दों से दूर रहना चाहिए
किसी का अपमान नहीं करना चाहिए
नशा और गलत कर्मों से बचना चाहिए
अधिक मास की पूजा से क्या फल प्राप्त होता है
भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है
जीवन के कष्ट और बाधाएं कम होती हैं
मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है
परिवार में सुख और समृद्धि आती है
पाप कर्मों का क्षय होता है
मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है
अधिक मास में पूजा क्यों करनी चाहिए
यह मास आत्मशुद्धि और ईश्वर भक्ति का विशेष अवसर माना गया है। सामान्य दिनों की तुलना में इस समय किए गए धार्मिक कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है। यही कारण है कि ऋषि-मुनियों ने अधिक मास को साधना, संयम और सेवा का श्रेष्ठ समय बताया है।
विशेष -अधिक मास केवल एक अतिरिक्त महीना नहीं बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का दिव्य अवसर है। इस समय भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जाप, दान और सत्संग करने से व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और पुण्य का संचार होता है। श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा मनुष्य को ईश्वर के और निकट ले जाती है।
