नई दिल्ली,
नई दिल्ली(HRIDAY STAMBH);देश में कथित ‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन की चर्चाओं को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शनों, प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर पैसे दिए जाने और महिला पुलिस अधिकारी के साथ हुई अभद्रता के आरोपों को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। बीजेपी ने इन घटनाओं को लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं को अस्थिर करने की कथित कोशिश बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
इस राजनीतिक विवाद में अब केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बयान ने भी नया मोड़ ला दिया है। रिजिजू ने विपक्ष पर युवाओं को भड़काकर देश में हिंसा और अव्यवस्था फैलाने की कथित साजिश रचने का आरोप लगाया है। उन्होंने बांग्लादेश और फ्रांस में हुए हिंसक घटनाक्रमों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन केवल चुनाव के माध्यम से हो सकता है, किसी बाहरी ताकत या हिंसक आंदोलन के जरिए नहीं।
हिमाचल बीजेपी महासचिव संजीव कटवाल ने राहुल गांधी से मांगा जवाब
हिमाचल प्रदेश बीजेपी के प्रदेश महासचिव संजीव कटवाल ने रविवार को जारी एक प्रेस बयान में कांग्रेस और राहुल गांधी को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की आड़ में हिंसा, धमकी और अव्यवस्था को जायज नहीं ठहराया जा सकता।
कटवाल ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन इस अधिकार की आड़ में लोकतांत्रिक संस्थाओं को अस्थिर करने या असंवैधानिक तरीके से सत्ता परिवर्तन की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती।
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां सरकार बदलने का अधिकार जनता के पास है। सत्ता परिवर्तन का एकमात्र संवैधानिक रास्ता चुनाव और जनता का जनादेश है। यदि कोई राजनीतिक दल या संगठन हिंसा, डराने-धमकाने अथवा अन्य असंवैधानिक गतिविधियों के जरिए सत्ता बदलने की कोशिश करता है तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
प्रदर्शनकारियों को 6 से 10 हजार रुपये देने का दावा
बीजेपी महासचिव संजीव कटवाल ने सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे उन दावों का भी जिक्र किया, जिनमें आरोप लगाया जा रहा है कि दिल्ली में राजनीतिक प्रदर्शनों में शामिल होने वाले कुछ लोगों को 6 हजार से लेकर 10 हजार रुपये तक दिए जा रहे हैं।
दावों के मुताबिक, प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों को काले कोट पहनकर आने के निर्देश दिए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
कटवाल ने कहा कि यदि प्रदर्शनकारियों को पैसे देकर राजनीतिक गतिविधियों में शामिल कराया जा रहा है तो यह गंभीर जांच का विषय है। उन्होंने कहा कि जनसमर्थन पैसे के दम पर नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और राजनीतिक विचारधारा के आधार पर हासिल किया जाता है।
उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से इन आरोपों पर स्थिति स्पष्ट करने और निष्पक्ष जांच का समर्थन करने की मांग की।
महिला पुलिस अधिकारी के साथ कथित अभद्रता का मामला भी उठाया
बीजेपी नेता ने एक महिला पुलिस अधिकारी के साथ कथित अभद्रता और हमले के मामले को भी राजनीतिक विवाद से जोड़ते हुए सवाल उठाए।
कटवाल ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभा रहे पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। विशेष रूप से महिला पुलिस अधिकारी के साथ कथित मारपीट या अभद्रता गंभीर विषय है।
उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि क्या कांग्रेस नेतृत्व इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई का समर्थन करता है? क्या पार्टी कानून के सामने सभी को समान मानने के सिद्धांत पर कायम है?
उन्होंने राजस्थान में दिल्ली पुलिस के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया और कहा कि पुलिस की कार्रवाई पर कानूनी आपत्ति उठाई जा सकती है, लेकिन इसके लिए तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी है।
किरेन रिजिजू का बड़ा आरोप- भारत में भी बांग्लादेश और फ्रांस जैसी स्थिति बनाने की थी योजना
इस पूरे विवाद के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
18 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में रिजिजू ने आरोप लगाया कि भारत में कुछ भारत-विरोधी समूहों और कुछ राजनेताओं ने मिलकर युवाओं को भड़काने तथा सड़कों पर हिंसा फैलाने की योजना बनाई थी।
उन्होंने बांग्लादेश में हुए हिंसक घटनाक्रम और फ्रांस में दंगों, आगजनी तथा लूटपाट का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में भी इसी तरह की स्थिति पैदा करने की कथित साजिश रची गई थी।
रिजिजू ने कहा कि इस साजिश को अंजाम देने की कोशिश करने वाले लोग यह भूल गए कि भारत न तो बांग्लादेश है और न ही फ्रांस।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में सत्ता परिवर्तन पूरी तरह संभव है, लेकिन इसका रास्ता केवल चुनाव है। सत्ता परिवर्तन किसी बाहरी ताकत या जॉर्ज सोरोस के माध्यम से नहीं हो सकता।
रिजिजू ने अपने बयान में विपक्षी नेताओं और आंदोलन से जुड़े कुछ लोगों की टिप्पणियों का भी उल्लेख किया। उनका इशारा उन बयानों की ओर था, जिनमें देश में ‘रिजीम चेंज’ की बात कही गई थी।
प्रशांत भूषण और छात्र संगठनों के बयानों से बढ़ा विवाद
दरअसल, सत्ता परिवर्तन को लेकर यह राजनीतिक विवाद उस समय और तेज हो गया, जब वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि देश में निश्चित रूप से सत्ता परिवर्तन होगा और वे भी ऐसा चाहते हैं।
वहीं, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा के बांग्लादेश में हुए छात्र आंदोलन का उल्लेख करने और भारत में युवाओं के आंदोलन को लेकर दिए गए बयान ने भी राजनीतिक बहस को तेज कर दिया।
बीजेपी इन बयानों को देश में सरकार के खिलाफ व्यापक अस्थिरता पैदा करने की कथित कोशिश के रूप में पेश कर रही है। वहीं, विपक्षी खेमे की ओर से सत्ता परिवर्तन की मांग को लोकतांत्रिक अधिकार और चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी राजनीतिक अभिव्यक्ति के रूप में देखा जा रहा है।
SIR के विरोध से शुरू हुआ राजनीतिक टकराव
इस विवाद की पृष्ठभूमि में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन भी शामिल हैं।
विपक्षी दलों और विभिन्न संगठनों की ओर से निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की गई है।
राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई नेता चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार तथा निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाते रहे हैं।
दूसरी ओर बीजेपी का आरोप है कि चुनावी सुधार और लोकतांत्रिक अधिकारों के नाम पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों को राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
बीजेपी ने उठाए कई सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग
संजीव कटवाल ने कांग्रेस नेतृत्व से कई मुद्दों पर जवाब मांगा है। इनमें सत्ता परिवर्तन से जुड़े कथित बयान, प्रदर्शनकारियों को पैसे दिए जाने के आरोप, महिला पुलिस अधिकारी के साथ कथित अभद्रता और पुलिस कार्रवाई से जुड़े विवाद शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को अपनी गतिविधियों में पारदर्शिता और जिम्मेदारी बनाए रखनी चाहिए। लोकतंत्र में विरोध और असहमति की पूरी जगह है, लेकिन हिंसा और कानून हाथ में लेने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती।
अब कांग्रेस के जवाब पर टिकी निगाहें
रिजीम चेंज’ को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब बीजेपी और कांग्रेस के बीच बड़े राजनीतिक टकराव का रूप लेता दिखाई दे रहा है। एक तरफ बीजेपी इसे कथित असंवैधानिक गतिविधियों और देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश बता रही है, वहीं दूसरी तरफ SIR और चुनावी प्रक्रिया को लेकर विपक्ष के विरोध प्रदर्शन जारी हैं।
हालांकि, प्रदर्शनकारियों को पैसे दिए जाने और देश में हिंसा फैलाने की कथित साजिश जैसे आरोपों की स्वतंत्र जांच और ठोस प्रमाण सामने आना अभी बाकी है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी और क्या राजनीतिक दल लोकतांत्रिक असहमति तथा संवैधानिक मर्यादाओं के बीच संतुलन बनाए रख पाएंगे? फिलहाल इस मुद्दे पर देश की राजनीति में बयानबाजी तेज है और सबकी निगाहें कांग्रेस नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
