जहां शंख बजाना मना, वहां DJ कार्यक्रम कैसे?

देश विदेश

चमोली।

चमोली(HRIDAY STAMBH):उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में बिना प्रशासनिक अनुमति बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम के आयोजन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जहां धार्मिक मर्यादाओं के चलते शंख बजाने तक को लेकर नियमों का हवाला दिया जाता है, वहां DJ कार्यक्रम आयोजित किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए चमोली के जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) गौरव कुमार ने गढ़वाल स्काउट्स के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल शांतनु को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।

बिना अनुमति बड़े कार्यक्रम के आयोजन पर प्रशासन ने मांगा जवाब

जानकारी के अनुसार बद्रीनाथ धाम में गढ़वाल स्काउट्स की ओर से एक बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आयोजन के बाद प्रशासन ने इसकी अनुमति और प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। डीएम ने कमांडिंग ऑफिसर को नोटिस जारी कर पूछा है कि प्रशासन से पूर्व अनुमति लिए बिना धाम में इतना बड़ा कार्यक्रम किस आधार पर आयोजित किया

प्रशासन की ओर से जारी नोटिस के जवाब के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आयोजन के लिए किसी स्तर पर अनुमति ली गई थी या नहीं तथा कार्यक्रम के संबंध में प्रशासन से आवश्यक समन्वय किया गया था या नहीं

जहां शंख बजाना मना, वहां DJ की अनुमति कैसे?’,,

बद्रीनाथ धाम में DJ कार्यक्रम सामने आने के बाद धार्मिक मर्यादाओं को लेकर भी बहस तेज हो गई है। धार्मिक स्थल पर शंख बजाने तक को लेकर प्रतिबंध या मर्यादाओं का हवाला दिए जाने के बीच DJ और तेज ध्वनि वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम के आयोजन पर सवाल उठाया जा रहा है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने भी बद्रीनाथ धाम में DJ कॉन्सर्ट को अनुमति दिए जाने पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि धाम की धार्मिक मर्यादा और पवित्रता को ध्यान में रखते हुए इस तरह के आयोजनों पर विचार किया जाना चाहिए।
जोशी ने केंद्र और राज्य सरकार से ऐसे आयोजनों पर रोक लगाने तथा देवभूमि की धार्मिक मर्यादा बनाए रखने की मांग की। उनका कहना है कि बद्रीनाथ जैसे प्रमुख धार्मिक धाम को मनोरंजन कार्यक्रमों का स्थल नहीं बनाया जाना चाहिए।

आयोजन को लेकर अब प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर

मामले में फिलहाल प्रशासन ने संबंधित अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा है। अब कमांडिंग ऑफिसर की ओर से दिए जाने वाले जवाब के बाद आगे की कार्रवाई तय होने की संभावना है।
बद्रीनाथ धाम देश के प्रमुख धार्मिक तीर्थस्थलों में शामिल है। ऐसे में यहां किसी भी बड़े सांस्कृतिक या मनोरंजन कार्यक्रम को लेकर धार्मिक परंपराओं, ध्वनि संबंधी नियमों, प्रशासनिक अनुमति और सुरक्षा व्यवस्था का पालन महत्वपूर्ण माना जाता है। बिना अनुमति आयोजन के आरोपों ने इन सभी व्यवस्थाओं को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *