ईरान ने अमेरिकी विमान स्टील्थ फाइटर जेट एफ-35 को किया क्षतिग्रस्त

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तेहरान

ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण संघर्ष में, अमेरिका का सबसे आधुनिक स्टील्थ फाइटर जेट एफ-35 संदिग्ध रूप से ईरानी हमले की चपेट में आ गया। इस हमले के बाद विमान को मध्य पूर्व के एक गुप्त एयरबेस पर आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने पुष्टि की है कि यह फाइटर जेट ईरान के ऊपर एक कॉम्बैट मिशन पर था, तभी उसे नुकसान पहुंचा। हालांकि, राहत की बात यह है कि पायलट सुरक्षित है। यदि स्वतंत्र रूप से इस हमले की पुष्टि होती है, तो इस युद्ध में यह पहली बार होगा जब ईरान ने सीधे तौर पर किसी अमेरिकी अत्याधुनिक लड़ाकू विमान को निशाना बनाया है।
इससे पहले भी अमेरिकी वायुसेना को इस संघर्ष में नुकसान उठाना पड़ा है, लेकिन वे घटनाएं तकनीकी खामियों या गलतफहमी का परिणाम थीं। हाल ही में तीन एफ-15 विमान कुवैत की एयर डिफेंस प्रणाली द्वारा गलती से मार गिराए गए थे, जबकि इराक में एक रिफ्यूलिंग विमान क्रैश होने से 6 सैनिकों की मौत हो गई थी। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विरोध के स्वर उठने लगे हैं। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने इस युद्ध को गैरकानूनी करार देते हुए इसकी कड़ी आलोचना की है। दूसरी ओर, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मौत को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों पर विराम लग गया है। नेतन्याहू ने आधी रात को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दुनिया को अपने सुरक्षित होने का सबूत दिया। उन्होंने खुलासा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल को फिलहाल ईरान के तेल और गैस ठिकानों पर हमला न करने की सलाह दी है, जिसका इजरायल पालन कर रहा है। हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया कि ईरान के महत्वपूर्ण साउथ पार्स गैस फील्ड के प्रोसेसिंग प्लांट पर किया गया हमला इजरायल का एकलौता ऑपरेशन था, जिसे युद्ध में एक बड़े एस्केलेशन के तौर पर देखा जा रहा है। युद्ध अब ऊर्जा ठिकानों तक फैल चुका है। ईरान ने जवाब में खाड़ी देशों के ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। कतर के रास लफ्फान गैस हब पर हुए हमले ने वैश्विक गैस संकट की आशंका बढ़ा दी है, जिससे दुनिया भर में तेल और गैस की कीमतों में उछाल आया है। वहीं, ईरान के भीतर भी हालात तनावपूर्ण हैं। ईरानी सरकार ने विरोध प्रदर्शनों से जुड़े तीन लोगों को सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी है, जिनमें एक 19 वर्षीय पहलवान भी शामिल था। मानवाधिकार संगठनों ने इन सजाओं को निष्पक्ष सुनवाई के बिना लिया गया फर्जी फैसला बताया है।

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