सड़क पर तड़पती ‘गौमाता’ और बदबू मारता प्रशासन: NH-44 पर हर दिन हो रहीं दर्जनों मौतें, NHAI से लेकर स्थानीय अमला तक बेखबर

डबरा/भितरवार

डबरा।

कहने को गाय ‘माता’ है, लेकिन धरातल पर उसकी कद्र कचरे से भी बदतर हो चुकी है। डबरा से गुजरने वाले नेशनल हाईवे-44 और आसपास के क्षेत्रों में हर दिन व्यवस्था की नाकामी का खूनी खेल खेला जा रहा है। आवारा मवेशी और एनएचएआई (NHAI) की आपराधिक लापरवाही के कारण रोजाना एक दर्जन से ज्यादा गायें तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आकर तड़प-तड़पकर दम तोड़ रही हैं। लेकिन अफसोस! न तो एनएचएआई के जिम्मेदार अधिकारियों को फर्क पड़ रहा है, न स्थानीय नगरपालिका को और न ही जिला प्रशासन को। पूरा का पूरा प्रशासनिक अमला आंखें मूंदकर किसी बड़े हादसे या महामारी के फैलने का इंतजार कर रहा है।

कचरा घर में फेंकी जा रही लाशें, संवेदनहीनता की हदें पार

प्रशासन की इस नग्न संवेदनहीनता का एक भयावह मंजर रविवार दोपहर लगभग 3:30 बजे बमरौली मंदिर से डबरा मार्ग पर देखने को मिला। नगर पालिका की ट्रैक्टर-ट्रॉली में मरी हुई गायों को किसी कचरे की तरह लादकर चांदपुर स्थित कचरा घर में फेंकने ले जाया जा रहा था। जिस गाय के नाम पर वोट मांगे जाते हैं, उसी गाय के शव को वैज्ञानिक तरीके से दफनाने के बजाय खुले कचरे के ढेर में फेंका जा रहा है।

NH-44 पर सांस लेना दूभर, सड़ांध से संक्रमण का खतरा

यदि आप नेशनल हाईवे-44 पर निकल जाएं, तो खुले वातावरण में उठती तीखी बदबू के कारण दो मिनट चलना भी दूभर हो जाएगा। जगह-जगह सड़क किनारे गायों के शव सड़ रहे हैं, उन पर कीड़े बिलबिला रहे हैं और दुर्गंध से पूरा क्षेत्र बेहाल है। किसी भी जिम्मेदार विभाग ने इन शवों को उठवाने या सही तरीके से दफनाने की जहमत नहीं उठाई। इस भयंकर लापरवाही के कारण पूरे क्षेत्र में गंभीर संक्रामक बीमारियां और महामारी फैलने का खतरा मंडरा रहा है।

NHAI की मॉनिटरिंग फेल, सिर्फ टोल वसूलने में दिलचस्पी

नियम के मुताबिक नेशनल हाईवे पर यदि कोई मवेशी सड़क पर या किनारे बैठा है, तो उसे तत्काल हटाने और ट्रैफिक सुचारू रखने की जिम्मेदारी एनएचएआई की मॉनिटरिंग टीम की है। लेकिन एनएचएआई का काम सिर्फ टोल वसूलने तक सीमित होकर रह गया है। हाईवे पर आवारा मवेशियों को रोकने के लिए न तो कैटल कैचर हैं, न ही बैरीकेडिंग के कोई इंतजाम। एनएचएआई कर्मचारियों की इस घोर लापरवाही की वजह से न सिर्फ बेजुबान जानवर अपनी जान गंवा रहे हैं, बल्कि आए दिन वाहन चालक और राहगीर भी टकराकर अकाल मौत के मुंह में समा रहे हैं।

जिम्मेदारों की पूरी चेन खामोश, आमजन भगवान भरोसे

इस पूरी तबाही में जवाबदेही की लंबी चेन है—जिसमें एनएचएआई, जिला प्रशासन, डबरा विकासखंड के प्रशासनिक अधिकारी, नगरपालिका, नगर पंचायत और ग्राम पंचायतें शामिल हैं। लेकिन हकीकत यह है कि हर कोई एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ रहा है। बार-बार सवाल उठाने और खबरें उजागर होने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। ऐसा लगता है जैसे आम जनता और बेजुबान गायों को मरने के लिए सड़कों पर लावारिस छोड़ दिया गया है।
यदि समय रहते एनएचएआई और स्थानीय प्रशासन ने सड़कों से मवेशियों को हटाने, उनके संरक्षण की व्यवस्था करने और मृत पशुओं के सम्मानजनक व वैज्ञानिक निस्तारण के कदम नहीं उठाए, तो जनाक्रोश सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा।

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