एलपीजी संकट: भारत के लिए खतरे की घंटी

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‘धड़ाधड़’ सिलेंडर मिलने में अभी लगेंगे कई साल

नई दिल्ली: भारत में रसोई गैस (LPG) की सुचारू आपूर्ति पर काले बादल मंडराने लगे हैं। वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन में आई बड़ी रुकावट के कारण अब पहले की तरह आसानी से गैस सिलेंडर मिलना मुश्किल हो सकता है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, इस संकट से पूरी तरह उबरने में भारत को 3 से 4 साल का लंबा वक्त लग सकता है।

क्यों चरमराई सप्लाई चेन?
एलपीजी की कमी का मुख्य कारण खाड़ी देशों (Gulf Countries) में एलपीजी इन्फ्रास्ट्रक्चर को हुआ भारी नुकसान बताया जा रहा है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर को क्षति, खाड़ी देशों में उत्पादन और वितरण केंद्रों को नुकसान पहुँचा है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उत्पादन में यह रुकावट अस्थायी है या बुनियादी ढांचे को स्थायी नुकसान पहुँचा है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार, सप्लाई चेन में आई यह बाधा रातों-रात ठीक होने वाली नहीं है।

भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। सप्लाई चेन टूटने का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ेगा:
1. वेटिंग पीरियड: गैस सिलेंडरों की बुकिंग और डिलीवरी के बीच का समय बढ़ सकता है।
2. आयात पर निर्भरता: खाड़ी देशों में मंदी या तकनीकी खराबी का सीधा असर भारतीय रसोई के बजट और उपलब्धता पर दिखता है।
3. आर्थिक दबाव: यदि सप्लाई कम रही और मांग बनी रही, तो भविष्य में कीमतों में अस्थिरता की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

विशेषज्ञों और सरकारी सूत्रों की मानें तो सप्लाई चेन को पुराने ढर्रे पर लौटने में कम से कम 2029-2030 तक का समय लग सकता है। जब तक खाड़ी देशों में मरम्मत और उत्पादन क्षमता का विस्तार नहीं होता, तब तक भारत को वैकल्पिक मार्गों या घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर देना होगा।

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