भितरवार ,
भितरवार (HRIDAY STAMBH);क्षेत्र के ग्राम सिल्हा में अवैध शराब के कारोबार को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश एक बार फिर भड़क उठा है। करीब 10 दिन पहले महिलाओं द्वारा किए गए उग्र आंदोलन और मुख्य मार्ग पर चक्काजाम के बाद बंद कराई गई कथित अवैध कलारी के दोबारा खुलेआम शुरू होने से गांव में तनाव का माहौल व्याप्त हो गया है। इस घटनाक्रम के बाद बेलगड़ा पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पुलिस पर आरोप और वायरल वीडियो की चर्चा
ग्रामीण महिलाओं ने बेलगड़ा थाना पुलिस के कुछ कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिलाओं का कहना है कि पुलिसकर्मी गांव में अवैध शराब बिकवाने के लिए ग्रामीणों और विरोध करने वालों पर अनुचित दबाव बना रहे हैं। आरोप यह भी है कि विरोध दर्ज कराने वाले लोगों को डराया-धमकाया जा रहा है। मामले से जुड़ा एक कथित वीडियो भी सामने आया है, जिससे पुलिस महकमे की साख पर सवाल उठ रहे हैं।
10 दिन पहले सड़क पर उतरी थीं महिलाएं
स्थानीय निवासियों के मुताबिक, सिल्हा गांव में लंबे समय से अवैध शराब का धंधा फल-फूल रहा था। इससे परेशान होकर लगभग 10 दिन पूर्व महिलाओं ने एकजुट होकर मुख्य मार्ग पर चक्काजाम किया था। भारी विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन और पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बिक्री बंद कराई थी। हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि वह कार्रवाई केवल एक छलावा थी और अब फिर से बेखौफ होकर अवैध शराब बेची जा रही है।
उग्र आंदोलन की चेतावनी और मांग
बेलगड़ा पुलिस पर संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए महिलाओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि गांव में अवैध शराब की बिक्री तुरंत बंद नहीं की गई और ग्रामीणों को धमकाना बंद नहीं हुआ, तो वे दोबारा सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगी। महिलाओं ने जिले के उच्च अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पुलिसकर्मियों व शराब माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
संपादकीय टिप्पणी / उठते सवाल
- कार्रवाई महज छलावा? आंदोलन के महज 10 दिन भीतर ही बंद कराई गई अवैध दुकान का दोबारा खुल जाना पुलिस और आबकारी विभाग की मंशा पर संदेह पैदा करता है।
- किसके इशारे पर दबाव? सवाल यह है कि क्या बेलगड़ा पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बजाय शराब माफिया के प्रभाव में काम कर रही है? यदि ग्रामीणों के आरोप सही हैं, तो माफिया के बजाय आम जनता पर दबाव किसके इशारे पर बनाया जा रहा है?

