रीवा,
रीवा(HRIDAY STAMBH);मध्य प्रदेश के रीवा जिले में चिकित्सा जगत का एक अद्भुत और सराहनीय मामला सामने आया है। रीवा के प्रसिद्ध संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय (Sanjay Gandhi Hospital Rewa) के डॉक्टरों ने अपनी सूझबूझ और बेहतरीन कौशल का परिचय देते हुए एक साल की मासूम बच्ची की जान बचा ली है। बच्ची की आहारनली (Esophagus) में पिछले 5 दिनों से एक नुकीली धातु की स्प्रिंग और चने फंसे हुए थे, जिससे उसकी स्थिति बेहद नाजुक हो गई थी।
क्या है पूरा मामला?
सीधी जिले के कुसमी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम दुहकुरिया के रहने वाले श्यामलाल सिंह की एक वर्षीय पुत्री सृष्टि ने 1 अक्टूबर को घर पर खेलते समय दुर्घटनावश एक नुकीली धातु की स्प्रिंग निगल ली थी। इसके बाद से ही बच्ची को लगातार उल्टियां होने लगीं, गले में तेज दर्द हुआ और उसका कुछ भी खाना-पीना पूरी तरह बंद हो गया।
परिजनों की एक लापरवाही से बढ़ी मुश्किलें
घटना के तुरंत बाद परिजन बच्ची को सीधी के स्थानीय अस्पताल लेकर गए, जहां एक्स-रे से गले में धातु की वस्तु फंसे होने की पुष्टि हुई और डॉक्टरों ने उसे रीवा रेफर कर दिया। हालांकि, परिजन बच्ची को तुरंत रीवा न ले जाकर वापस गांव ले आए और घरेलू उपाय के तहत बच्ची को चने खिला दिए, ताकि स्प्रिंग नीचे खिसक जाए।
इस गंभीर लापरवाही के कारण स्प्रिंग के साथ-साथ तीन चने भी गले में फंस गए, जिससे स्थिति और अधिक खतरनाक हो गई। बच्ची पानी की एक बूंद तक अंदर नहीं उतार पा रही थी।
जटिल ऑपरेशन और डॉक्टरों का फैसला
5 अक्टूबर को गंभीर हालत में परिजनों ने बच्ची को रीवा के संजय गांधी अस्पताल के ईएनटी (ENT – नाक, कान, गला) विभाग में भर्ती कराया।
- सेडेशन का जोखिम: बाल रोग विशेषज्ञों और ईएनटी टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि बच्ची की नाजुक हालत को देखते हुए सीटी स्कैन के लिए सेडेशन (बेहोशी) देना बहुत जोखिम भरा था।
- आपातकालीन रणनीति: ईएनटी विभाग के एचओडी प्रोफेसर डॉ. सुरेन्द्र सिंह मौपाची, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पल्लवी इंदुरकर और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नीरज कुमार दुबे के मार्गदर्शन में डॉक्टरों ने बिना सीटी स्कैन के केवल एक्स-रे के आधार पर ही तुरंत ऑपरेशन का साहसिक निर्णय लिया।
- दूरबीन विधि (Rigid Esophagoscopy): एनेस्थीसिया और ईएनटी विभाग की संयुक्त टीम ने अत्याधुनिक दूरबीन तकनीक का उपयोग करते हुए बेहद सावधानी के साथ आहारनली में फंसी नुकीली स्प्रिंग और तीनों चनों को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया।
5 दिन ऑब्जर्वेशन के बाद बच्ची डिस्चार्ज
सफल और जटिल सर्जरी के बाद बच्ची को लगातार 5 दिनों तक डॉक्टरों की कड़ी निगरानी (ऑब्जर्वेशन) में रखा गया। जब बच्ची की सेहत में पूरी तरह सुधार हो गया, तब शनिवार, 10 अक्टूबर को उसे अस्पताल से स्वस्थ घोषित कर डिस्चार्ज कर दिया गया।
डॉक्टरों की सख्त चेतावनी और पैरेंट्स के लिए सलाह
संजय गांधी अस्पताल के ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेन्द्र सिंह मौपाची ने इस घटना के बाद सभी अभिभावकों से एक महत्वपूर्ण अपील की है:
“यदि कभी भी आपका बच्चा कोई नुकीली, खिलौने की वस्तु या सिक्के जैसी चीज निगल ले, तो कभी भी घरेलू नुस्खे (जैसे चने या खाना खिलाना) न अपनाएं। ऐसा करने से स्थिति और गंभीर हो जाती है। तुरंत किसी नजदीकी बड़े अस्पताल के विशेषज्ञों से संपर्क करें।”


