जीवाजी यूनिवर्सिटी से 8-10 लाख में फर्जी MBBS की डिग्री खरीदी

ग्वालियर

दमोह (हृदय स्तंभ/HRIDAY STAMBH): स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप तब मच गया जब ये सुनने में आया कि जीवाजी यूनिवर्सिटी और रीवा मेडिकल कॉलेज से 8-10 लाख में फर्जी MBBS की डिग्री खरीदी गई और इन्हीं डिग्री के आधार पर ये फर्जी डॉक्टर सरकारी आरोग्य केंद्रों और संजीवनी क्लिनिक पर तैनात पाए गए ।

मध्य प्रदेश के दमोह जिले में सरकारी स्वास्थ्य महकमे की नाक के नीचे चल रहे एक बहुत बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के जरिए सरकारी आरोग्य केंद्रों और संजीवनी क्लीनिकों में तैनात तीन ऐसे ‘मुन्नाभाई’ डॉक्टर पकड़े गए हैं, जिनकी एमबीबीएस (MBBS) की डिग्री और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) का रजिस्ट्रेशन पूरी तरह फर्जी निकला। चौंकाने वाली बात यह है कि इन आरोपियों ने 8 से 10 लाख रुपये की भारी-भरकम रकम देकर ये जाली डिग्रियां खरीदी थीं। इस सनसनीखेज खुलासे में ग्वालियर की जीवाजी यूनिवर्सिटी और रीवा मेडिकल कॉलेज का नाम भी सामने आ रहा है, जिसने पूरे चिकित्सा जगत में हड़कंप मचा दिया है।

पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त जांच में गिरफ्तार किए गए फर्जी डॉक्टरों में ग्वालियर का कुमार सचिन यादव, सीहोर का राजपाल गौर और मुरैना का अजय मौर्य शामिल हैं। इनमें से सचिन यादव पिछले पांच महीनों से और राजपाल गौर करीब एक साल से दमोह के सरकारी संजीवनी क्लीनिक में ओपीडी संभाल रहे थे, जबकि अजय मौर्य पिछले ढाई साल से जबलपुर के संजीवनी अस्पताल में डॉक्टर बनकर बैठा था। जांच में पता चला कि असलियत में सचिन के पास बीडीएस (डेंटिस्ट) और राजपाल के पास बीएचएमएस (होम्योपैथी) की डिग्री थी, लेकिन ज्यादा पैसा कमाने और सरकारी नौकरी पाने के लालच में इन दोनों ने जाली दस्तावेज तैयार किए और खुद को एमबीबीएस डॉक्टर बताकर सिस्टम को चूना लगा दिया।

दमोह के सीएमएचओ डॉ. राजेश अठ्या ने बताया कि ये फर्जी डॉक्टर हर महीने 70 से 80 हजार रुपये की मोटी सैलरी डकार रहे थे और रोजाना करीब 30 से 40 बेगुनाह मरीजों का इलाज कर रहे थे। गनीमत यह रही कि संजीवनी क्लीनिक में सिर्फ सामान्य ओपीडी सेवाएं होती हैं, इसलिए किसी मरीज को जानलेवा दवा देने की बात सामने नहीं आई है। इस पूरे फर्जीवाड़े की कलई तब खुली जब डिग्रियों के वेरिफिकेशन के दौरान एमसीआई की वेबसाइट पर इनके रजिस्ट्रेशन नंबर किसी और के नाम पर दर्ज मिले। स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल भोपाल स्थित एनएचएम कार्यालय को पत्र लिखकर इनकी नियुक्ति रद्द करने की सिफारिश की है।

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