झारखंड की दो राज्य सभा सीटों पर होने वाले आगामी चुनाव के लिए चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। निर्वाचन आयोग की अधिसूचना के बाद 1 जून से नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जो 8 जून तक चलेगी। इसके बाद 18 जून को मतदान और वोटों की गिनती की जाएगी। ये दोनों सीटें झामुमो (JMM) के दिग्गज नेता शिबू सोरेन के निधन और भाजपा नेता दीपक प्रकाश का कार्यकाल पूरा होने के कारण खाली हुई हैं।
भले ही नंबर गेम में सत्तारूढ़ इंडिया गठबंधन (INDIA Bloc) का पलड़ा भारी दिख रहा हो, लेकिन एनडीए (NDA) के चुनावी मैदान में उतरने के फैसले ने इस मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया है।
क्या है झारखंड विधानसभा का ‘नंबर गेम’?
राज्य सभा की एक सीट जीतने के लिए 28 वोटों की आवश्यकता होगी। सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा( Jharkhand Mukti Morcha) के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन के पास 56 विधायक हैं। ऐसे में दोनों सीटों पर उसकी जीत लगभग तय मानी जा रही है। वहीं, 24 विधायकों वाले एनडीए को एक सीट जीतने के लिए चार अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ेगी।
इसके बावजूद एनडीए ने चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया है। यही वजह है कि राज्यसभा का यह चुनाव दिलचस्प हो गया है। अब राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि क्या एनडीए इस चुनाव में कोई बड़ा उलटफेर कर पाएगा या फिर इंडिया गठबंधन दोनों सीटों पर कब्जा बरकरार रखेगा।
सीटों के बंटवारे पर सस्पेंस: एक पर JMM, दूसरी पर कांग्रेस का दावा
सत्ता पक्ष और विपक्ष ने अभी तक अपने उम्मीदवारों के नामों का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है। दोनों गठबंधनों में प्रत्याशियों को लेकर सस्पेंस बरकरार है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में संभावित उम्मीदवारों के नामों को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है।
इधर, सत्तारूढ़ इंडिया गठबंधन में लगातार बैठकों का दौर जारी है। राज्यसभा उम्मीदवारों के नाम पर विस्तार से मंथन किया जा रहा है। गठबंधन में शामिल जेएमएम की एक सीट पर दावेदारी लगभग तय मानी जा रही है, जबकि दूसरी सीट पर कांग्रेस अपना दावा मजबूत तरीके से पेश कर रही है।
बहुमत से दूर एनडीए
उधर, विपक्षी एनडीए खेमे ने बहुमत नहीं होने के बावजूद राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार उतारने की तैयारी शुरू कर दी है। इसे लेकर गठबंधन के भीतर लगातार मंथन चल रहा है। एनडीए (भाजपा, आजसू, जदयू और लोजपा) के पास फिलहाल कुल 24 विधायक हैं, जो एक सीट जीतने के लिए आवश्यक 28 वोटों से चार कम हैं। ऐसे में एनडीए को जीत के लिए चार अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। इसी कारण उम्मीदवार के नाम पर अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
जयराम महतो (JLKM) की भूमिका बनी ‘एक्स फैक्टर’
इस पूरे चुनाव में जेएलकेएम (JLKM) के एकमात्र विधायक जयराम महतो की भूमिका बेहद अहम हो गई है। जयराम महतो फिलहाल किसी भी खेमे के साथ खुलकर खड़े नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में उनका एक-एक वोट और उनका राजनीतिक रुख इस चुनाव के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
