वॉशिंगटन/बीजिंग: मिडिल ईस्ट में तनाव एक नए चरम पर पहुँच गया है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की घेराबंदी के फैसले ने अमेरिका और चीन को आमने-सामने खड़ा कर दिया है। चीन ने दोटूक शब्दों में अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि वह अपने व्यापारिक हितों के रास्ते में किसी भी तीसरे देश का दखल बर्दाश्त नहीं करेगा। चीन के रक्षा मंत्री, एडमिरल डोंग जून ने ट्रंप प्रशासन के इस कदम पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन और ईरान के बीच द्विपक्षीय संबंध और व्यापारिक रिश्ते पूरी तरह वैध हैं। डोंग जून ने कहा:
“चीन अपने संप्रभु अधिकारों और व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है।”
न रुकेंगे जहाज, न थमेगा व्यापार : चीन ने साफ कर दिया है कि अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी के बावजूद उसके मालवाहक जहाज और तेल टैंकर पहले की तरह ही होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरेंगे। बीजिंग का मानना है कि अमेरिका को किसी भी देश के आपसी व्यापार में हस्तक्षेप करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
ट्रंप प्रशासन का आक्रामक रुख
डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी शुरू कर दी है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य ईरान पर आर्थिक दबाव बनाना और उसकी तेल आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करना माना जा रहा है। हालांकि, इस फैसले ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी हलचल पैदा कर दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिकी नौसेना और चीनी जहाजों के बीच कोई सीधी भिड़ंत होती है, तो यह वैश्विक स्तर पर एक बड़े युद्ध का रूप ले सकती है। इससे न केवल कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन भी पूरी तरह ठप हो सकती है।
