उपेक्षा का शिकार ऐतिहासिक धूमेश्वर महादेव मंदिर, प्रशासन बेखबर;

डबरा/भितरवार

धूमेश्वर,

धूमेश्वर(HRIDAY STAMBH);अंचल का अत्यंत प्राचीन, ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व का प्रतीक ‘धूमेश्वर महादेव मंदिर’ इन दिनों भारी प्रशासनिक उपेक्षा और बदहाली का शिकार है। लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र होने के बावजूद इस ऐतिहासिक धरोहर के रख-रखाव व संरक्षण की दिशा में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। उचित देखभाल के अभाव में मंदिर का प्राचीन ढांचा कमजोर पड़ता जा रहा है, जिससे स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं में गहराk आक्रोश है।

दीवारों पर गहरी दरारें, अस्तित्व खतरे में

​वर्षों पुराने इस पौराणिक मंदिर की संरचना समय के थपेड़ों और लापरवाही के कारण जर्जर हो रही है। मंदिर के बाहरी तथा आंतरिक हिस्सों की दीवारों पर बड़ी-बड़ी दरारें साफ देखी जा सकती हैं। कई स्थानों पर दीवारें धीरे-धीरे ध्वस्त होकर गिरने भी लगी हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि प्रशासन और पुरातत्व विभाग ने जल्द ही इसकी मरम्मत का कार्य शुरू नहीं कराया, तो इस प्राचीन धरोहर का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह जमींदोज हो सकता है।

​न कोई कार्य योजना, न जीर्णोद्धार के प्रयास

​स्थिति के लगातार बिगड़ने के बाद भी पुरातत्व विभाग या स्थानीय प्रशासन की ओर से इसके संरक्षण के लिए कोई विस्तृत एक्शन प्लान (Action Plan) तैयार नहीं किया गया है। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के दौरे तो क्षेत्र में अक्सर होते रहते हैं, लेकिन इस पौराणिक मंदिर के कायाकल्प पर किसी का ध्यान नहीं जाता। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जीर्णोद्धार के नाम पर अब तक केवल कागजी खानापूर्ति ही की गई है।

​लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से खिलवाड़

​धूमेश्वर महादेव मंदिर केवल एक प्राचीन इमारत नहीं, बल्कि आसपास के अंचल के हजारों-लाखों श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा का केंद्र है। महाशिवरात्रि, सावन मास और प्रत्येक सोमवार को यहाँ दूर-दूर से श्रद्धालु जलाभिषेक और दर्शन-पूजन के लिए जुटते हैं। मंदिर की दुर्दशा और जिम्मेदार विभागों की अनदेखी से श्रद्धालुओं की भावनाएँ आहत हो रही हैं।

​उग्र आंदोलन की ओर कदम बढ़ाएंगे ग्रामीण

​स्थानीय निवासियों और मंदिर समिति के सदस्यों ने चेतावनी दी है कि वे कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन और आवेदनों के माध्यम से अवगत करा चुके हैं, लेकिन हर बार केवल खोखले आश्वासन ही मिले हैं। यदि जल्द ही मंदिर के संरक्षण और जीर्णोद्धार का कार्य धरातल पर शुरू नहीं किया गया, तो क्षेत्र की जनता चरणबद्ध तरीके से विरोध-प्रदर्शन और उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।

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