डबरा
हरिपुर-सिमरिया मार्ग पर फुस्स हुए दावे, हादसे के इंतजार में सो रहा प्रशासन
डबरा (HRIDAY STAMBH): शहर को स्मार्ट और सुरक्षित बनाने के बड़े-बड़े दावों की पोल हरिपुर-सिमरिया मुख्य मार्ग पर पूरी तरह खुल चुकी है। लाखों-करोड़ों रुपये का सरकारी बजट ठिकाने लगाकर, ढोल-नगाड़ों और नेताओं की मौजूदगी में जिस स्ट्रीट लाइट परियोजना का बड़े तामझाम से उद्घाटन हुआ था, वह आज पूरी तरह सफेद हाथी साबित हो रही है। विकास के नाम पर जनता के खून-पसीने की कमाई को कैसे ठिकाने लगाया जाता है, यह मार्ग उसकी जीती-जागती मिसाल है।
अंधेरे की आगोश में मुख्य मार्ग: हादसों और अपराधियों का बना अड्डा
हरिपुर से लेकर सिमरिया तक का यह बेहद व्यस्त मार्ग अब शाम ढलते ही खौफनाक अंधेरे की चादर ओढ़ लेता है। इस अंधेरे का सीधा फायदा उठाकर इस मार्ग पर कई आपराधिक घटनाएं और जानलेवा हादसे घट चुके हैं। हैरत और गुस्से की बात यह है कि बार-बार हो रही वारदातों के बावजूद संवेदनहीन प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है। क्या जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि किसी मासूम की जान जाने का इंतजार कर रहे हैं?
‘आम जनता के लिए अंधेरा, वीआईपी के लिए रोशनी’ — स्थानीय लोगों का आक्रोश
प्रशासनिक लापरवाही पर स्थानीय निवासी अरविंद रावत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।
“लाइटें लगने के नाम पर जनता के साथ सरासर छलावा हुआ है। यह लाइटें महीने में सिर्फ गिनती के दिन ही जलती हैं। जब इस मार्ग से किसी बड़े नेता या अधिकारी का काफिला गुजरता है, सिर्फ तभी सड़कें जगमगाती हैं। वीआईपी के जाते ही फिर अंधेरा छा जाता है। आम जनता रोज़ डर के साए में सफर करने को मजबूर है।”
— अरविंद रावत, स्थानीय निवासी
स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि उद्घाटन के वक्त लंबे-चौड़े वादे करने वाले जिम्मेदार अब बिलों में जा छिपे हैं। लाइटों की घटिया गुणवत्ता और रखरखाव में बरती जा रही घोर लापरवाही सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है।
अंतिम चेतावनी: सुधार नहीं तो आंदोलन
जनता अब झूठे आश्वासनों से तंग आ चुकी है। हरिपुर-सिमरिया मार्ग के निवासियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द इन स्ट्रीट लाइटों को चालू कर मार्ग को सुरक्षित नहीं बनाया गया, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन करेंगे। देखना यह होगा कि जनआक्रोश भड़कने से पहले प्रशासन की कुंभकर्णी नींद टूटती है या नहीं।
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