अमृत 2.0 की पाइपलाइन बिछी पर गड्ढा भरना भूले: दतिया के वार्ड 22 में 5 महीने से नरक भोगने को मजबूर रहवासी,

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दतिया(HRIDAY STAMBH);प्रदेश सरकार भले ही अमृत 2.0 योजना के जरिए शहरों में बेहतर बुनियादी सुविधाएं देने के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन दतिया में इसकी जमीनी हकीकत दावों से बिल्कुल उलट है। ठंडी सड़क स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (नंबर-1 स्कूल) के पास विकास के नाम पर खोदा गया नाला अब स्थानीय लोगों के लिए जी का जंजाल बन चुका है। पाइपलाइन डाले जाने का काम महीनों पहले पूरा होने के बाद भी ठेकेदार की लापरवाही के कारण सड़क और नाला आज भी बदहाल स्थिति में पड़ा है।

​5 महीने से जस की तस स्थिति, मंडरा रहा हादसों का खतरा

​स्थानीय रहवासियों के अनुसार, पाइपलाइन बिछाने के लिए करीब 5 महीने पहले गड्ढा खोदा गया था। काम पूरा होने के बाद ठेकेदार और निर्माण एजेंसी ने मौके की सुध नहीं ली। अधूरा छोड़ा गया नाला और सड़क पर बिखरा मलबा राहगीरों व स्कूली बच्चों के लिए हर पल हादसे को न्योता दे रहा है। स्कूल पास होने के कारण यहां रोजाना सैकड़ों बच्चों की आवाजाही रहती है, जिससे बारिश और रात के अंधेरे में गंभीर हादसे की आशंका बनी रहती है।

​गंदगी और बदबू से जीना दुश्वार

​स्थानीय लोगों का कहना है कि खुले नाले में गंदा पानी जमा होने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है और बदबू के कारण घरों में रहना दूभर हो गया है। दुकानदारों का व्यापार प्रभावित हो रहा है तथा बुजुर्गों व बच्चों का निकलना मुश्किल हो चुका है। रहवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।

​जनप्रतिनिधि और नगर पालिका प्रशासन पर उठे सवाल

​यह क्षेत्र वार्ड क्रमांक 22 में आता है, जहां के पार्षद सरवन कुशवाहा हैं। जनता अब सीधे जनप्रतिनिधि और नगर पालिका की कार्यशैली पर सवाल उठा रही है:

  • ​पाइपलाइन बिछाने के 5 महीने बाद भी सड़क और नाले को दुरुस्त क्यों नहीं कराया गया?
  • ​क्या जिम्मेदार अधिकारियों और पार्षद को इस गंभीर समस्या की जानकारी नहीं है?
  • ​लापरवाही बरतने वाले ठेकेदार या एजेंसी पर अब तक कोई दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

​प्रशासनिक मॉनिटरिंग पर उठे सवाल

​अमृत 2.0 जैसी फ्लैगशिप योजना में इस तरह की लापरवाही प्रशासनिक निगरानी की पोल खोलती है। अब देखना यह होगा कि मामला उजागर होने के बाद नगर पालिका प्रशासन हरकत में आता है या रहवासियों को यूं ही मुश्किलों के साए में जीने के लिए छोड़ दिया जाता है।

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