डबरा,
डबरा (HRIDAY STAMBH);
एक तरफ जहां पूरा शहर आगामी पावन पर्वों की तैयारियों और उल्लास में डूबा हुआ है, वहीं दूसरी ओर डबरा नगर पालिका प्रशासन की गहरी उदासीनता और लापरवाही के चलते आम जनता का जीवन नर्क बन गया है। त्योहारी सीजन में शहर को साफ-सुथरा रखने के बड़े-बड़े दावे करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की कलई जगह-जगह सड़कों पर लगे कचरे के विशाल ढेर खोल रहे हैं। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि मुख्य मार्गों से लेकर व्यस्त चौराहों तक कचरे के पहाड़ खड़े हैं, जिनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
मिश्रा पेट्रोल पंप के सामने बदतर हालात
इस व्यवस्था की बानगी शहर के व्यस्त इलाके में स्थित मिश्रा पेट्रोल पंप के ठीक सामने साफ देखी जा सकती है, जहां मेन रोड पर पिछले कई दिनों से कचरे का भारी अंबार लगा हुआ है। स्थिति तब और भी ज्यादा भयावह हो जाती है जब नगर पालिका के सफाई कर्मी या अन्य लोग इस कचरे को उठाने की जहमत उठाने के बजाय उसमें आग लगा जाते हैं। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस कचरे के ढेर के बिलकुल पास ही एक स्कूल संचालित होता है, जहां रोजाना सैकड़ों छोटे-छोटे बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं। इन मासूम बच्चों को स्कूल आने-जाने के दौरान इस कचरे और जहरीले धुएं के बीच से गुजरना पड़ रहा है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य पर मंडराता खतरा
कचरे के इन ढेरों में प्लास्टिक, पॉलिथीन और अन्य तमाम हानिकारक अपशिष्ट पदार्थों के जलने से उठने वाला जहरीला काला धुआं पूरे वायुमंडल को प्रदूषित कर रहा है। इस दमघूंट धुएं की वजह से आसपास के दुकानदारों, राहगीरों और स्कूली बच्चों को आंखों में भारी जलन, सांस लेने में तकलीफ और खांसी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। त्योहारी माहौल के बीच जहां फिजा में खुशबू और उत्साह होना चाहिए, वहां नगर पालिका की लापरवाही के कारण हवा में जहर घुल रहा है और वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच रहा है।
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
शहर के प्रबुद्ध नागरिकों और स्थानीय दुकानदारों में इस प्रशासनिक लापरवाही को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि त्योहारों के समय जब विशेष साफ-सफाई और निगरानी की आवश्यकता होती है, तब डबरा नगर पालिका कुंभकर्णी नींद सो रही है। स्थानीय लोगों द्वारा कई बार इस गंभीर समस्या की शिकायत किए जाने के बावजूद प्रशासनिक अमले के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। यदि समय रहते नगर पालिका प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया और कचरा जलाने वाले लापरवाह कर्मियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की, तो जनता का यह गुस्सा कभी भी बड़े आंदोलन के रूप में फूट सकता है, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

