बहाव थमा, पर छोड़ गया तबाही: दुकानों और मकानों में राशन, सामान खाक

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चित्रकूट

जलप्रलय का मंजर, पहली मंजिल तक पहुंचा पानी, थम गई जिंदगी

चित्रकूट (HRIDAY STAMBH): चित्रकूट धाम में आई भीषण बाढ़ ने तबाही का ऐसा मंजर दिखाया है जिसे देखकर हर किसी की रूह कांप उठे। बाढ़ के विकराल रूप के कारण शहर के कई इलाकों में पानी पहली मंजिल (ग्राउंड फ्लोर) तक पहुंच गया, जिससे पूरा जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। देखते ही देखते लोगों के आशियाने और दुकानें पानी में पूरी तरह जलमग्न हो गईं। पानी उतरने के बाद अब जो तस्वीर सामने आ रही है, वह अत्यंत दर्दनाक है—घर का सामान और दुकानों में रखा हर एक उत्पाद पूरी तरह बर्बाद हो चुका है।

पहली मंजिल तक भरा पानी, नुकसान का आकलन भी असंभव

बाढ़ के पानी ने रिहाइशी मकानों और व्यावसायिक बाजारों दोनों को बुरी तरह अपनी चपेट में लिया। जिन मकानों की पहली मंजिल जलमग्न हुई, वहां राशन, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स और जरूरी कागजात जलसमाधि ले चुके हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नुकसान इतना व्यापक है कि इसका मौद्रिक आकलन कर पाना भी बेहद मुश्किल नजर आ रहा है।

‘बैंक का कर्ज कैसे चुकाऊंगा?’— बिलख पड़े पीड़ित दुकानदार

बाढ़ का सबसे भीषण असर छोटे और मध्यम दुकानदारों पर पड़ा है, जिनकी रोजी-रोटी का इकलौता जरिया यही दुकानें थीं। एक स्थानीय व्यापारी ने आंखों में आंसू भरकर अपना दर्द साझा करते हुए बताया, “मैंने हाल ही में अपनी दुकान में नया सामान भरने के लिए बैंक से लोन लिया था। आज बाढ़ के पानी ने सब कुछ सड़ा दिया, दुकान में एक तिनका भी बेचने लायक नहीं बचा। चूंकि यह एक प्राकृतिक आपदा है, इसलिए साधारण बीमा में इसका क्लेम भी नहीं मिलता। अब समझ नहीं आ रहा कि बैंक का कर्ज कैसे चुकाऊंगा और परिवार का पेट कैसे पालूंगा।”

“पूरी पूंजी बर्बाद, कहां से करें नई शुरुआत”

तबाही की कहानी यहीं खत्म नहीं होती। एक अन्य दुकानदार ने अपना दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उसकी जिंदगी भर की जमा-पूंजी इस बाढ़ की भेंट चढ़ गई है। उन्होंने बताया, “वर्षों की मेहनत से जो पूंजी जोड़ी थी, वह आंखों के सामने बह गई या खराब हो गई। अब सब कुछ शून्य हो चुका है। मन में भारी असमंजस है कि आखिर खुद को कैसे संभालें और इस दुकान को दोबारा कैसे शुरू करें।”

प्रशासनिक मदद और राहत की आस

बाढ़ का पानी भले ही धीरे-धीरे कम हो रहा हो, लेकिन पीड़ितों के सिर पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। आर्थिक और मानसिक रूप से टूटे इन व्यापारियों और आम नागरिकों को अब केवल सरकारी राहत, मुआवजा और आपदा प्रबंधन कोष से मिलने वाली सहायता का ही सहारा है। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि सरकार और प्रशासन तुरंत नुकसान का सर्वे कराए और पीड़ितों के बैंक लोन माफी या पुनर्वास के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा करे।

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