डबरा,
डबरा(HRIDAY STAMBH );सामूहिक पत्रकार वार्ता में पार्षदों ने निर्माण कार्य में लगातार सामने आ रही खामियों पर उठाए सवाल, बोले- जनता के पैसों से हो रहे काम में लापरवाही बर्दाश्त नहीं
डबरा। डबरा विधानसभा क्षेत्र में चल रहे सीवर लाइन निर्माण कार्य को लेकर अब विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। निर्माण कार्य में लगातार सामने आ रही कथित खामियों और तकनीकी मानकों को लेकर नगर पालिका के कई पार्षदों ने एकजुट होकर मोर्चा खोल दिया है। इसी मुद्दे को लेकर नगर पालिका के पार्षदों ने सामूहिक पत्रकार वार्ता आयोजित कर सीवर लाइन परियोजना के कार्यों पर गंभीर सवाल खड़े किए और निर्माण की गुणवत्ता तथा उपयोग की जा रही सामग्री को लेकर अपना असंतोष जाहिर किया।
पत्रकार वार्ता में नगर पालिका उपाध्यक्ष सत्येंद्र दुबे के साथ पार्षद जयेंद्र गुर्जर, हीरा सरदार, हैप्पी, सुमित साहू, खुमान कुशवाह, लवलेश केन, कमलेश बाथम, नरेश पलिया सहित अन्य पार्षद मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में सीवर लाइन निर्माण कार्य में सामने आ रही खामियों पर चिंता जताते हुए संबंधित जिम्मेदारों से जवाबदेही तय करने की मांग उठाई।
7 इंची पाइप के इस्तेमाल पर भी उठाए सवाल
पत्रकार वार्ता के दौरान सीवर लाइन निर्माण में उपयोग किए जा रहे 7 इंची पाइप को लेकर भी पार्षदों ने असंतोष जाहिर किया। उनका सवाल है कि इतनी महत्वपूर्ण और लंबे समय तक शहर की जरूरतों से जुड़ी रहने वाली परियोजना में पाइप का चयन किन तकनीकी मानकों के आधार पर किया गया है? क्या इसकी क्षमता और गुणवत्ता निर्धारित मापदंडों के अनुरूप है? पार्षदों ने पाइप के आकार, उसकी उपयोगिता और परियोजना में उसके इस्तेमाल को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत बताई।
करोड़ों की परियोजना में गुणवत्ता से समझौता क्यों
सीवर लाइन किसी भी शहर के लिए बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजना होती है। इसका उद्देश्य शहर की जल निकासी और स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाना होता है। ऐसे में यदि निर्माण के दौरान तकनीकी खामियां रह जाती हैं तो भविष्य में इसका खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ सकता है।
पार्षदों का विरोध इसी आशंका को लेकर है कि निर्माण कार्य में यदि अभी कमियों को दूर नहीं किया गया तो आने वाले समय में सीवर व्यवस्था लोगों के लिए राहत के बजाय परेशानी का कारण बन सकती है। सड़कें खोदने, पाइप डालने और फिर सड़कों को बहाल करने जैसे कार्यों में लापरवाही होने पर आम नागरिकों को भी परेशानी उठानी पड़ती है।
इस पत्रकार वार्ता की खास बात यह रही कि अलग-अलग वार्डों का प्रतिनिधित्व करने वाले कई पार्षद एक साथ सामने आए। इससे स्पष्ट है कि सीवर लाइन निर्माण का मुद्दा अब केवल किसी एक वार्ड या क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसे लेकर नगर पालिका के जनप्रतिनिधियों के बीच भी असंतोष बढ़ रहा है।
पार्षदों ने निर्माण कार्य में सामने आ रही कमियों की जांच, तकनीकी मानकों की समीक्षा और इस्तेमाल की जा रही सामग्री की गुणवत्ता की जांच कराने की जरूरत पर जोर दिया।
जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब की उम्मीद
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सीवर लाइन निर्माण की जिम्मेदारी संभाल रहे विभागीय अधिकारी, निर्माण एजेंसी और तकनीकी विशेषज्ञ पार्षदों द्वारा उठाए गए सवालों पर क्या जवाब देते हैं। क्या पाइप की क्षमता और गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी? क्या निर्माण कार्य का तकनीकी ऑडिट होगा? और यदि कहीं निर्धारित मानकों के विपरीत काम पाया जाता है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी?
फिलहाल पार्षदों की सामूहिक पत्रकार वार्ता के बाद सीवर लाइन परियोजना की गुणवत्ता और कार्यप्रणाली को लेकर शहर में चर्चा तेज हो गई है। अब देखना होगा कि संबंधित जिम्मेदार इस विरोध को कितनी गंभीरता से लेते हैं और जनता के हित में निर्माण कार्य की कमियों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाते हैं।


