भिंड,
भिंड (HRIDAY STAMBH);नवरात्रि के पावन पर्व पर मध्य प्रदेश के भिंड जिले से महिला सशक्तिकरण और नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा देने वाली एक बेहद अनूठी और प्रेरणादायक खबर सामने आई है। जिला पंचायत अध्यक्ष कामना सिंह भदौरिया ने ‘नव संकल्प अभियान – 9 दिन, 9 बेटियाँ’ की शुरुआत की है। इस विशेष पहल के तहत नवरात्रि के नौ दिनों में रोजाना एक अलग बेटी को जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी और प्रशासनिक अधिकार सौंपे जा रहे हैं, ताकि बेटियां शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली को करीब से समझ सकें।
छतरपुर की ‘बिन्नू रानी’ ने संभाली कमान
इस अभियान के तीसरे दिन मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले की बेहद लोकप्रिय सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर और अपनी अनूठी बुंदेली शैली के लिए देश-विदेश में पहचानी जाने वाली ‘बिन्नू रानी’ (दीपा यादव) को भिंड जिले का एक दिन का सांकेतिक जिला पंचायत अध्यक्ष बनाया गया।
कुर्सी संभालते ही बिन्नू रानी ने पूरी गंभीरता और कड़े प्रशासनिक तेवरों के साथ कामकाज की शुरुआत की। उन्होंने जिला पंचायत कार्यालय पहुंचकर विभागीय कामकाज की बारीकियों को समझा, ग्रामीण विकास कार्यों की समीक्षा की और अधिकारियों के साथ अहम चर्चा की। उनके इस आत्मविश्वास और प्रशासनिक अंदाज की चर्चा अब पूरे प्रदेश में हो रही है।
खजुराहो सांसद ने दी बधाई, मिल रही है चौतरफा सराहना
कामना सिंह भदौरिया की इस दूरदर्शी सोच और अनूठी पहल की गूंज सिर्फ स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि भोपाल और दिल्ली तक सुनाई दे रही है। प्रदेश के कई मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों ने इसकी सराहना की है। इसके साथ ही खजुराहो सांसद विष्णु दत्त शर्मा (V.D. Sharma) ने भी फोन पर बिन्नू रानी से बातचीत कर उन्हें बधाई दी और इस पहल की भूरी-भूरी प्रशंसा की।
अध्यक्ष कामना सिंह भदौरिया का संदेश:
“बेटियां किसी भी क्षेत्र में किसी से पीछे नहीं हैं। यदि उन्हें उचित मंच और अवसर मिले, तो वे राजनीति और प्रशासन दोनों मोर्चों पर बेहतरीन नेतृत्व साबित कर सकती हैं। नवरात्रि में कन्या पूजन का वास्तविक अर्थ तभी सार्थक होता है जब हम बेटियों को समाज में निर्णय लेने की वास्तविक शक्ति दें।”
महिलाओं और बालिकाओं के लिए प्रेरणा
विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों का मानना है कि इस तरह के अभियानों से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की बालिकाओं में आत्मविश्वास बढ़ता है। प्रशासनिक व्यवस्थाओं और राजनीति को जमीनी स्तर पर देखने से भविष्य में महिलाओं की सहभागिता नीति निर्माण और प्रशासनिक पदों पर और अधिक मजबूत होगी।


