महुआ मोइत्रा पर निशिकांत दुबे का तंज

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सियासी जंग में ‘साड़ी’ की एंट्री

 

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा के बीच लंबे समय से चली आ रही जुबानी जंग का एक नया अध्याय है। इस बार विवाद का केंद्र ‘ढाकाई जामदानी साड़ी’ और ‘बांग्लादेशी’ होने के आरोप बने हैं।

पश्चिम बंगाल चुनाव परिणामों के बाद राजनीतिक पारा एक बार फिर चढ़ गया है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और टीएमसी की तेजतर्रार नेता महुआ मोइत्रा के बीच सोशल मीडिया पर जमकर ‘साड़ी युद्ध’ छिड़ा हुआ है। तंज और कटाक्ष के इस दौर में अब ‘ढाका में शोरूम’ खोलने तक की बात पहुंच गई है।

महुआ मोइत्रा का ‘पाखंड’ वाला आरोप

विवाद की जड़ महुआ मोइत्रा का वह सोशल मीडिया पोस्ट है, जिसमें उन्होंने भाजपा के राष्ट्रवाद पर सवाल उठाए। महुआ ने बिना नाम लिए निशिकांत दुबे पर निशाना साधते हुए लिखा:

भाजपा के पेशेवर उपद्रवी सांसद हमें बांग्लादेशी और रोहिंग्या कहते हैं, जबकि उनकी पत्नी बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान लोगों को फोन करके पूछती हैं कि उन्हें ‘असली ढाकाई जामदानी’ साड़ियां कहां मिल सकती हैं। यह भाजपा का दोहरा चरित्र है।”

महुआ का तर्क था कि एक तरफ भाजपा घुसपैठ और बांग्लादेशी पहचान को मुद्दा बनाती है, वहीं दूसरी ओर उनके परिवार को बांग्लादेश की प्रसिद्ध जामदानी साड़ियों का शौक है।

निशिकांत दुबे का ‘भाभी’ संबोधन और पलटवार

महुआ के इस हमले पर निशिकांत दुबे ने बेहद व्यंग्यात्मक लहजे में जवाब दिया। उन्होंने न केवल महुआ के तंज का जवाब दिया, बल्कि उन्हें ‘भाभी’ कहकर संबोधित करते हुए एक नया विवाद खड़ा कर दिया।

निशिकांत दुबे ने ‘X’ पर लिखा:
उन्होंने कहा कि पिनाकी मिश्रा (बीजेडी नेता) उनके पुराने मित्र हैं, इसलिए महुआ मोइत्रा उनकी ‘भाभी’ समान हैं। दुबे ने कटाक्ष करते हुए लिखा कि उन्होंने बांग्लादेश के नवनियुक्त राजदूत से सिफारिश की है कि महुआ भाभी के लिए ढाका में एक जामदानी साड़ी का शोरूम या बुनकर केंद्र खुलवा दिया जाए। उन्होंने तंज कसा कि इससे किसी को साड़ी के लिए इधर-उधर पूछना नहीं पड़ेगा और लोग सीधे महुआ जी की दुकान से साड़ियां खरीद सकेंगे।

 व्यक्तिगत हमलों में तब्दील होती राजनीति

यह पहली बार नहीं है जब इन दोनों सांसदों के बीच ऐसी बयानबाजी हुई है। इससे पहले ‘कैश फॉर क्वेरी’ मामले में भी दोनों के बीच भारी विवाद हो चुका है। हालांकि, इस बार का विवाद नीतिगत मुद्दों से हटकर व्यक्तिगत पसंद, कपड़ों और रिश्तों की दुहाई तक सिमट गया है।

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