पहली बार ब्रह्मोस का सिमुलेशन फायर करेगा फिलीपींस, चीन को संदेश

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मनीला:

BrahMos Missile: बालिकतन सैन्य अभ्यास में होगा बड़ा कदम, बिना असली मिसाइल दागे युद्ध जैसी तैयारी

मनीला: फिलीपींस की सेना पहली बार ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की सिमुलेशन फायरिंग करने जा रही है। दरअसल, यह अभ्यास भारत और फिलीपींस के बीच 2022 में हुई डिफेंस डील का अहम हिस्सा माना जा रहा है। इसके साथ ही, इस कदम को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बालिकतन अभ्यास में दिखेगी ताकत: सबसे पहले, यह सिमुलेशन फायरिंग फिलीपींस और अमेरिका के बीच होने वाले वार्षिक बालिकतन सैन्य अभ्यास के दौरान की जाएगी। इस दौरान, फिलीपींस की नौसेना समुद्री हमले के चरण में ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल “वर्चुअल मोड” में करेगी। यानी, वास्तविक मिसाइल दागे बिना ही दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाने की पूरी प्रक्रिया का अभ्यास किया जाएगा।

क्या होती है सिमुलेशन फायरिंग?: दरअसल, सिमुलेशन फायरिंग एक हाई-टेक वर्चुअल अभ्यास होता है। इसमें सैनिक कंप्यूटर सिस्टम और असली लॉन्चर के कंट्रोल पैनल की मदद से दुश्मन के लक्ष्यों को ट्रैक करते हैं।
इसके बाद, वे उसी तरह मिसाइल लॉन्च करने की प्रक्रिया को अंजाम देते हैं जैसे वास्तविक युद्ध में किया जाता है। हालांकि, इस दौरान असली मिसाइल दागी नहीं जाती। इसके अलावा, इस तकनीक के कई बड़े फायदे हैं। सबसे अहम, इससे दुर्घटनाओं का जोखिम लगभग खत्म हो जाता है।
साथ ही, महंगी मिसाइल और गोला-बारूद की बचत होती है। इतना ही नहीं, सैनिकों को बिना खतरे के वास्तविक युद्ध जैसा अनुभव भी मिलता है।

चीन को रणनीतिक संदेश:

गौरतलब है कि फिलीपींस ने ब्रह्मोस मिसाइल खास तौर पर चीन के खिलाफ अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने के लिए खरीदी है। दरअसल, दक्षिण चीन सागर में द्वीपों को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से विवाद जारी है। ऐसे में, यह सिमुलेशन अभ्यास सीधे तौर पर चीन को एक मजबूत रणनीतिक संदेश भी माना जा रहा है।
यह कदम भारत और फिलीपींस के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग को भी दर्शाता है। ब्रह्मोस मिसाइल डील न सिर्फ भारत की रक्षा निर्यात क्षमता को मजबूत करती है, बल्कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में उसकी रणनीतिक भूमिका को भी बढ़ाती है।

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