श्योपुर परिषद की बैठक में एक अरब से अधिक का रखा बजट

श्योपुर

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अध्यक्षता को लेकर असमंजस भरी रही स्थिति, सात दिन बाद फिर बुलाई जायेगी बैठक

श्योपुर। नगर पालिका परिषद की बजट बैठक शुक्रवार को दोपहर 03 बजे करीब सात महीने बाद बुलाई गई जिसमें वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1 अरब 13 करोड़ 70 लाख रुपए का बजट प्रस्तुत किया गया। हालांकि बैठक में अध्यक्ष पद को लेकर बने असमंजस की स्थिति हावी रही। लगभग 40 मिनट चली इस बैठक में मात्र 6 लाख 8 हजार रुपए की मामूली बचत वाला बजट प्रस्तुत किया गया। कई पार्षदों ने बजट पर अपनी आपत्तियां और सुझाव रखे, लेकिन उन पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया और चर्चा महज औपचारिकता बनकर रह गई। अधिकारविहीन अध्यक्ष रेणु सुजीत गर्ग बैठक में पहुंचीं, लेकिन तीन-चार मिनट रुकने के बाद बिना कुर्सी संभाले ही वापस लौट गईं। उनके लिए कुर्सी लगाई गई थी, पर उन्होंने बैठना उचित नहीं समझा और बिना कुछ कहे बाहर चली गईं, जिससे बैठक में असमंजस की स्थिति बनी रही। सीएमओ राधेरमण यादव द्वारा प्रस्तुत बजट को परिषद की स्वीकृति के लिए रखा गया। अंततः यह निर्णय लिया गया कि सात दिन बाद सभी पार्षदों की सहमति से नया एजेंडा जारी कर दोबारा बैठक बुलाई जाएगी। बजट में नगर पालिका की आय बढ़ाने पर फोकस किया गया है। चुंगी क्षतिपूर्ति मद में 12 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया है, जो पिछले वर्ष से अधिक है। संपत्ति कर, समेकित कर और बाजार फीस से भी आय बढ़ने का अनुमान जताया गया है। दुकान किराया, जलकर और रजिस्ट्रेशन शुल्क से भी लाखों की आय प्रस्तावित है। सबसे बड़ा प्रावधान दुकान प्रीमियम के रूप में 7 करोड़ रुपए का है, जिसमें टेलीफोन एक्सचेंज क्षेत्र में दुकानों के निर्माण से आय की उम्मीद जताई गई है। इसके अलावा 16वें वित्त आयोग, स्वच्छता मिशन, एसबीएम 2.0, प्रधानमंत्री आवास योजना सहित कई योजनाओं से भी करोड़ों रुपए मिलने का अनुमान है।

व्यय में वेतन और सफाई पर फोकस

व्यय बजट में कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और पेंशन पर बड़ा हिस्सा रखा गया है। सफाई व्यवस्था, भविष्य निधि, फायर ब्रिगेड और सार्वजनिक सुरक्षा पर भी महत्वपूर्ण खर्च प्रस्तावित है। शहर के बुनियादी ढांचे के लिए विद्युत बिल, डीजल खर्च और जल प्रदाय व्यवस्था पर करोड़ों रुपए का प्रावधान किया गया है। चौपाटी निर्माण के लिए 5 करोड़, पार्क विकास के लिए 50 लाख और सार्वजनिक शौचालय व कचरा प्रबंधन के लिए भी अलग-अलग मदों में राशि तय की गई है।

मेला और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए भी राशि

बजट में मेला आयोजन के लिए 40 लाख, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए 17 लाख, खेल गतिविधियों के लिए 15 लाख और धार्मिक और राष्ट्रीय पर्वों के लिए 22 लाख रुपए का प्रावधान रखा गया है।

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