ग्वालियर: स्वास्थ्य विभाग की बड़ी स्ट्राइक

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16 निजी अस्पतालों के लाइसेंस निरस्त

 

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ग्वालियर। जिले के निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम संचालकों द्वारा नियमों की अनदेखी अब उनके लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. सचिन श्रीवास्तव ने कड़ा रुख अपनाते हुए जिले के 16 निजी अस्पतालों के पंजीयन तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए हैं। इस कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य महकमे और निजी अस्पताल संचालकों में हड़कंप मच गया है।
नियमों के उल्लंघन पर गिरी गाज

CMHO कार्यालय के अनुसार, इन अस्पतालों के खिलाफ यह सख्त कदम ‘मध्य प्रदेश उपचर्यागृह तथा रूग्णोपचार संबंधी स्थापनाएं अधिनियम’ के तहत उठाया गया है। लंबे समय से इन केंद्रों पर नियमों के उल्लंघन और लापरवाही की शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद प्रशासन ने यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की।

कार्रवाई के मुख्य प्रभाव:

नई भर्ती पर रोक: ये अस्पताल अब किसी भी नए मरीज को भर्ती नहीं कर सकेंगे।
सेवाओं पर प्रतिबंध: अस्पताल परिसर में किसी भी प्रकार की चिकित्सा सेवाएं प्रदान करना अब अवैध माना जाएगा।
लाइसेंस रद्द: इन सभी संस्थानों के आधिकारिक पंजीयन को शून्य घोषित कर दिया गया है।

प्रशासन द्वारा जारी सूची के अनुसार, शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के निम्नलिखित अस्पतालों के लाइसेंस रद्द किए गए हैं:

इन 16 अस्पतालों पर हुई कार्रवाई (सूची)

कल्याण जी मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल, बझेरा टेकनपुर
वाईएसएम अस्पताल, तिघरा रोड
आशा देवी मेमोरियल अस्पताल, मोतीझील
राम कृष्णा अस्पताल, साडा क्षेत्र
केयर एंड क्योर हॉस्पिटल, काउंटर मेगनेट
लीला मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल, गोला का मंदिर
प्राइम केयर एंड क्योर हॉस्पिटल, एबी रोड
पीतांबरा माता नर्सिंग होम, मदनपुरा
मयूर नर्सिंग होम, मुरार
श्री कृष्णा अस्पताल, हुरावली रोड
गौतम स्पेशलिटी अस्पताल, डबरा
चोपड़ा चेस्ट अस्पताल, चेतकपुरी
के.के. अस्पताल, कटी घाटी
वसुन्धरा राजे अस्पताल, लश्कर
शिवानी आई अस्पताल, मुरार
महादेव अस्पताल, भिंड रोड

प्रशासन की चेतावनी: CMHO डॉ. सचिन श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया है कि स्वास्थ्य मानकों से समझौता करने वाले किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा। जिले के अन्य नर्सिंग होम और क्लीनिकों को भी सख्त हिदायत दी गई है कि वे निर्धारित मानदंडों का पालन सुनिश्चित करें, अन्यथा भविष्य में उन पर भी इसी तरह की कठोर कार्रवाई की जा सकती है।

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