गोकुल में छड़ीमार होली: गोपियों ने पुलिस ही नहीं विदेशी सैलानियों पर भी बरसाईं छड़ियां

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दुल्हन की तरह सजी महिलाएं, श्रीकृष्ण-बलराम के बाल रूप पर खेला रंग
ब्रज के गोकुल में रविवार को छड़ीमार होली की धूम रही, जिसमें महिलाएं दुल्हन की तरह सज-संवरकर भगवान श्रीकृष्ण और बलराम के बाल स्वरूप पर रंग और छड़ियों की वर्षा करती दिखाई दीं। इस बार गोपियों ने न केवल स्थानीय लोगों बल्कि बड़ी संख्या में आए विदेशी सैलानियों और पुलिसकर्मियों को भी दनादन छड़ियों की झड़ी से नवाज़ा।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बलदेव विधानसभा के बीजेपी विधायक पूरन प्रकाश ने इस मौके पर राधा-कृष्ण बने कलाकारों के साथ मंच पर डांस कर कार्यक्रम में भाग लिया। इससे पहले दोपहर 12:30 बजे नंदभवन से भगवान श्रीकृष्ण का डोला निकला, जिसमें कन्हैया और बलराम के बाल रूप सवार थे। लोग डोले के आगे-पीछे रंग-गुलाल उड़ाते हुए मस्ती में चलते दिखाई दिए। रास्ते में यात्रा का जोरदार स्वागत किया गया, फूल, रंग और अबीर से डोले को सजाया गया। चौराहों पर बड़े स्टेज तैयार किए गए, जिन पर महिलाएं सज-धजकर डांस करती रहीं। गलियों में होली के गीत और ‘जय राधे, जय कृष्णा’ के भजन गूंजते रहे।
छड़ीमार होली की परंपरा
गोकुल में छड़ीमार होली का प्रचलन सदियों पुराना है। ऐसा माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण और बलराम ने यहीं बाल लीलाएं की थीं। इस खेल में उपयोग की जाने वाली छड़ियों पर गोटेदार कपड़ा लपेटा जाता है, जिससे चोट नहीं लगती। बरसाना और नंदगांव की लट्ठमार होली की तरह गोकुल की इस परंपरा में भी महिलाएं प्रमुख भूमिका निभाती हैं। इस बार की होली में नंदगांव और बरसाना के आयोजनों की याद भी ताजा हो गई थी, जहां राधारानी की सखियों और श्रीकृष्ण के सखाओं के बीच रंगीन छड़ीमार का खेल हुआ।
गोकुल में छड़ीमार होली देखने आए लोगों ने इसे अत्यंत रोचक और जीवंत उत्सव बताया। स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाली, लेकिन उत्सव की अद्भुत झलक ने इसे और भी यादगार बना दिया।

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