नई दिल्ली:बीजेपी नेता और संचार एवं आईटी पर संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के ‘कम्युनिटी नोट्स’ फीचर पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के सामने मांग रखी है कि इस फीचर को तुरंत बंद किया जाना चाहिए।
मुख्य मांगें और सुझाव
निशिकांत दुबे ने ऑस्ट्रेलिया के कानूनों का हवाला देते हुए भारत सरकार के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:
1.पब्लिशर लाइसेंस: ‘एक्स’ को भारत में एक पब्लिशर (प्रकाशक) के तौर पर लाइसेंस लेना चाहिए।
2.भारी टैक्स: उन्होंने सुझाव दिया कि प्लेटफॉर्म को भारत में संचालन के लिए हर साल 25,000 करोड़ रुपये का टैक्स देना चाहिए।
3.फैक्ट-चेकिंग पर रोक: यदि प्लेटफॉर्म टैक्स और लाइसेंस की शर्तों को पूरा नहीं करता, तो उसका ‘कम्युनिटी नोट्स’ फीचर बंद कर दिया जाना चाहिए।
क्या है कम्युनिटी नोट्स फीचर?
कम्युनिटी नोट्स ‘एक्स’ का एक क्राउड-सोर्स्ड फैक्ट-चेकिंग टूल है। इसके तहत:
1. यदि कोई पोस्ट भ्रामक या गलत लगती है, तो सामान्य यूजर्स उस पर ‘नोट’ लिख सकते हैं।
2. जब अन्य यूजर्स उस नोट को ‘Helpful’ (मददगार) रेटिंग देते हैं, तो वह नोट मूल पोस्ट के नीचे दिखाई देने लगता है।
3. इसका उद्देश्य प्लेटफॉर्म पर गलत जानकारी को रोकना है।
विवाद की जड़: यूपी सरकार और पुक एआई (Puck AI) का करार
निशिकांत दुबे की यह मांग हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार से जुड़े एक मामले के बाद आई है।
घटनाक्रम कुछ इस प्रकार था:
* घोषणा: यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एआई पार्क और डेटा सेंटर के लिए पुक एआई के साथ 25,000 करोड़ रुपये के समझौते की घोषणा की थी।
* कम्युनिटी नोट का हस्तक्षेप: सीएम की इस पोस्ट पर एक कम्युनिटी नोट आया, जिसमें दावा किया गया कि पुक एआई महज एक साल पुराना स्टार्टअप है। इसका सालाना टर्नओवर 50 लाख रुपये से भी कम है, ऐसे में वह इतने बड़े निवेश के काबिल नहीं है।
* परिणाम: इस खुलासे और चर्चा के चार दिन बाद, उत्तर प्रदेश सरकार ने पुक एआई के साथ हुए इस करार को रद्द कर दिया।
निशिकांत दुबे का मानना है कि ‘एक्स’ जैसे प्लेटफॉर्म बिना किसी जवाबदेही के पब्लिशर की तरह काम कर रहे हैं और भारत सरकार को कोई टैक्स नहीं दे रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब ये प्लेटफॉर्म भारतीय डेटा और विज्ञापनों से कमाई करते हैं, तो उन्हें विनियमित क्यों नहीं किया जाना चाहिए।
