ट्रंप की चीन को खुली चेतावनी: ‘ईरान को हथियार दिए तो भुगतने होंगे गंभीर अंजाम’

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ट्रंप की चीन को दो-टूक चेतावनी

वाशिंगटन:अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को सख्त लहजे में आगाह किया है कि यदि उसने ईरान को हथियारों की आपूर्ति की, तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। ट्रंप के अनुसार:
1.ईरान को हथियार भेजना अमेरिका की सुरक्षा और जारी वार्ता में बड़ी बाधा माना जाएगा।
2.इससे चीन के लिए भविष्य में बड़ी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
3.अगले महीने ट्रंप की चीन यात्रा और शी जिनपिंग के साथ होने वाली वार्ता पर भी इसका बुरा असर पड़ सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव
समुद्री मार्ग को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच दावों का दौर जारी है:

अमेरिका का दावा: ईरान ने पानी में समुद्री बारूद (Mines) बिछाए हो सकते हैं। जवाब में अमेरिकी ‘माइन स्वीपर्स’ वहां सफाई अभियान चला रहे हैं।

ईरान का पलटवार: ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह होर्मुज स्ट्रेट से किसी भी सैन्य जहाज को गुजरने नहीं दे रहा है और वहां से कोई अमेरिकी शिप नहीं गुजरा है।
हथियारों की सप्लाई पर गहराता संदेह
अमेरिकी इंटेलिजेंस और विशेषज्ञों ने चीन और ईरान के बीच सैन्य साठगांठ की संभावना जताई है:
1. एयर डिफेंस सिस्टम: माना जा रहा है कि ईरान को अगले कुछ हफ्तों में चीन से नया एयर डिफेंस सिस्टम मिल सकता है।
2. चीनी HQ-9B: विशेषज्ञों का अनुमान है कि ईरान लंबी दूरी की मिसाइल प्रणाली HQ-9B का उपयोग कर रहा है।
3. कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल: ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान के ऊपर मार गिराए गए अमेरिकी F-15E विमान को गर्मी का पता लगाने वाली (Heat-seeking) कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल से निशाना बनाया गया था।
4. रॉकेट ईंधन: मार्च में चीन ने दो जहाजों को ईरान भेजा था, जिनमें सोडियम परक्लोरेट होने का संदेह है, जो ठोस रॉकेट ईंधन बनाने के काम आता है।
चीन का पक्ष: आरोपों का खंडन
वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है:
1.चीन ने कहा कि उसने संघर्ष के किसी भी पक्ष को हथियार नहीं दिए हैं।
2.अमेरिका को “बेबुनियाद आरोप” लगाने और सनसनी फैलाने से बचना चाहिए।
3.चीन का दावा है कि उसने ईरान को सीजफायर डील के लिए राजी करने में सकारात्मक भूमिका निभाई है।

नाजुक मोड़ पर युद्ध और शांति
हालांकि इस्लामाबाद वार्ता और दो हफ्ते का सीजफायर प्रभावी है, लेकिन स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान के साथ समझौता हो या न हो, जीत अमेरिका की ही होगी। वर्तमान में अमेरिकी जंगी जहाज और सेना ईरान के करीब तैनात हैं, जिससे क्षेत्र में युद्ध का खतरा पूरी तरह टला नहीं है।

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