दो ऐसे भाई जिनके घर घुसने से पहिले पुलिस को खुद तलाशी देनी पड़ी

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आखिर कौन हैं ये गैंगस्टर सोनू और मोनू, जिन्होंने सरेआम पुलिस की परीक्षा ले ली?

पटना (NEWS UPDATE): बिहार के मोकामा में अपराधियों को पकड़ने गई पुलिस की ही तलाशी लिए जाने के एक वीडियो ने सबको हैरान कर दिया है। इस घटना का संबंध मोकामा के दो कुख्यात गैंगस्टर भाइयों सोनू और मोनू के गिरोह से है।

पटना से सटे मोकामा में गैंगस्टर सोनू-मोनू के घर के बाहर का पुलिस का जो वीडियो वायरल हुआ है, उसने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बाहुबली विधायक अनंत सिंह के समर्थक मुकेश सिंह पर फायरिंग के बाद जब पुलिस आरोपियों को पकड़ने पहुंची, तो घर के बाहर ही थाना प्रभारी समेत पांच जवानों को कतार में खड़ा कर दिया गया। अपराधियों के गुर्गों और उनकी मां उर्मिला देवी ने पुलिसकर्मियों की सघन तलाशी ली, जिसके बाद ही उन्हें घर के भीतर जाने की इजाजत मिली।

हाई कोर्ट के वकील के बेटे और ईंट-भट्ठा कारोबारी

सोनू और मोनू पटना जिले के मोकामा के पचमहला थाना क्षेत्र के नौरंगा जलालपुर गांव के रहने वाले दो सगे भाई हैं। इनका पारिवारिक बैकग्राउंड किसी सामान्य अपराधी जैसा नहीं है। इनके पिता प्रमोद कुमार सिंह पेशे से पटना हाई कोर्ट के प्रतिष्ठित अधिवक्ता (वकील) हैं। सोनू-मोनू खुद इलाके में बड़े पैमाने पर ईंट-भट्ठे का संचालन और जमीन की खरीद-बिक्री का बड़ा कारोबार करते हैं। पैसे और रसूख के दम पर इन्होंने दियारा क्षेत्र में अपना एक मजबूत और आधुनिक हथियारों से लैस नया लड़कों का गैंग तैयार किया, जो धीरे-धीरे मोकामा में वर्चस्व की नई धुरी बन गया।

सोनू-मोनू गैंग शुरुआती दौर में मोकामा के बाहुबली और विधायक अनंत सिंह (छोटे सरकार) के बेहद करीब माना जाता था और उनके लिए काम करता था। लेकिन दोनों के बीच यह दोस्ती गहरी दुश्मनी में बदल गई, जिसकी नींव एक पंचायत चुनाव के दौरान पड़ी थी। दरअसल, नौरंगा जलालपुर पंचायत से सोनू-मोनू के परिवार की बहन पंचायत चुनाव लड़ना चाहती थी। लेकिन विरोधी गुट के कुख्यात अपराधी गुड्डू सिंह ने अनंत सिंह की शह पर उनकी बहन पर उम्र कम होने का आरोप लगाया और उसे चुनाव प्रक्रिया से बाहर करवा दिया।

आरोप है कि अनंत सिंह के इशारे पर गुड्डू सिंह ने सोनू-मोनू के परिवार को काफी प्रताड़ित और तंग किया, जिसके कारण उनकी बहन चुनाव नहीं लड़ सकी। अपने परिवार और बहन के इस अपमान को दोनों भाई बर्दाश्त नहीं कर पाए। उन्होंने अनंत सिंह का दामन छोड़ दिया और अनंत सिंह के साथ-साथ गुड्डू सिंह को भी अपना जानी दुश्मन बना लिया।

फिल्मी स्टाइल में गुड्डू सिंह की हत्या

बहन के अपमान और चुनावी रंजिश का बदला लेने के लिए सोनू-मोनू ने 8 सितंबर 2017 को पटना के बाढ़ कोर्ट परिसर में खूनी खेल खेला। दो दर्जन से अधिक संगीन मामलों और दोहरे हत्याकांड के आरोपी गुड्डू सिंह को जब पुलिस कस्टडी में एडीजे-2 की अदालत में पेशी के लिए लाया गया, तब भारी सुरक्षा के बीच दोनों भाइयों ने सुरक्षा घेरा तोड़ दिया। गुड्डू सिंह पर अंधाधुंध गोलियां बरसाकर उसे सरेआम कोर्ट के भीतर ही छलनी कर दिया और हथियार लहराते हुए बड़े आराम से फरार हो गए। इस सनसनीखेज हत्याकांड में सोनू-मोनू समेत कुल 8 लोगों को आरोपी बनाया गया था।

बाहुबली अनंत सिंह से सीधी भिड़ंत

सोनू-मोनू ने मोकामा के बेताज बादशाह कहे जाने वाले अनंत सिंह से भी सीधी टक्कर ली। साल 2025 में सोनू-मोनू का अपने ही एक पूर्व मुंशी मुकेश सिंह से विवाद हुआ, तो दोनों भाइयों ने मुकेश के घर पर ताला जड़ दिया। जब खुद पूर्व विधायक अनंत सिंह अपने दर्जनों समर्थकों और लाव-लश्कर के साथ मुकेश के घर का ताला खुलवाने नौरंगा जलालपुर गांव पहुंचे, तो सोनू-मोनू गैंग ने उनका रास्ता रोक लिया।

गांव के बीचों-बीच दोनों बाहुबली गुटों में 20 से 30 राउंड अंधाधुंध फायरिंग हुई, जिसमें अनंत सिंह के एक समर्थक को गोली लगी। इस घटना के बाद पुलिस के सामने सरेंडर करने से ठीक पहले सोनू सिंह ने कैमरे पर अनंत सिंह को खुली चुनौती देते हुए कहा था, ‘हम युवा हैं और वो बुजुर्ग। अगर वो हमसे भिड़ेंगे तो अंजाम क्या होगा वो जानते हैं। हम अनंत सिंह को शास्त्र और शस्त्र दोनों की परिभाषा अच्छी तरह समझा देंगे, विधायक जी बस वक्त का इंतजार करें।’ इस गैंगवार के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों (अनंत सिंह और सोनू-मोनू) को जेल भेज दिया था।

 

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