भारतीय रुपया गुरुवार को शुरुआती कारोबार में लगातार भारी दवाब में चल रहा है डॉलर के मुक़ाबले ये अपने सबसे निचले स्तर पर ट्रेड करता नज़र आ रहा है कच्चे तेल की ऊंची क़ीमतों के कारण और डॉलर की मजबूती के कारण रुपया पर दबाव बढ़ता चला जा रहा है
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.01 प्रति डॉलर पर खुला, लेकिन शुरुआती कारोबार में ही इसमें गिरावट तेज हो गई और यह 95.20 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया। इससे पहले बुधवार को भी रुपया 20 पैसे की कमजोरी के साथ 94.88 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ था।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 122 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ने की आशंका है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर रुपये पर पड़ता है।
इसके अलावा पश्चिम एशिया में संभावित व्यापक संघर्ष की आशंकाओं ने भी वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ा दी है। निवेशकों की बढ़ती चिंता के कारण सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में डॉलर की मांग बढ़ रही है, जिससे अन्य मुद्राओं पर दबाव बन रहा है।
इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.01 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 98.96 पर पहुंच गया, जो डॉलर की मजबूती को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और वैश्विक तनाव बढ़ता है, तो आने वाले दिनों में रुपये पर दबाव और बढ़ सकता है।
